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रायपुर 8 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / Forest fires in the summer become a deadly problem: awareness and caution can save the environment./ वनाग्नि से पर्यावरण खतरा , छत्तीसगढ़ में ग्रीष्म ऋतु के साथ ही वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। वनाग्नि से न केवल बहुमूल्य वन संपदा और जैव विविधता को क्षति पहुंचती है, बल्कि इससे पर्यावरण संतुलन, जलवायु और मानव जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

आग के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाते हैं और वे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने को मजबूर होते हैं, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है।

अग्नि वर्ष 2026 : सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

वर्ष 2026 के लिए अग्नि वर्ष 15 फरवरी से प्रारंभ हो जाता है। छत्तीसगढ़ का वन विभाग वनाग्नि से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापक तैयारियां की हैं।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के निर्देश पर रायपुर वनमंडल कार्यालय में अग्नि घटना सूचना नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जिससे आग की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। वन क्षेत्र में आग लगने की स्थिति में रायपुर जिले के नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर 0771-2427640 पर तुरंत सूचना देने की अपील की गई है।

वनाग्नि के प्रमुख कारण

कृषि अपशिष्ट का असावधानीपूर्वक दहन, सड़क किनारे आग जलाना, बीड़ी–सिगरेट के जलते टुकड़े फेंकना, चरवाहों द्वारा लापरवाही तथा असामाजिक तत्वों की गतिविधियां वनाग्नि के प्रमुख कारण हैं। थोड़ी सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

उल्लेखनीय है कि वन विभाग द्वारा अग्निपट्टियों व निर्धारित क्षेत्रों में नियंत्रित दहन किया जाता है, उनकी देखरेख में ही यह करें।

सुरक्षा उपाय और जनभागीदारी

वनों को आग से सुरक्षित रखने के लिए नियंत्रित दहन की सतत निगरानी, ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी, समय पर सूचना देना और आग बुझाने में वन अमले को सहयोग देना अत्यंत आवश्यक है। वन क्षेत्रों एवं आसपास आग न जलाने, धूम्रपान से बचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत देने की अपील की गई है। हवा के तेज चलने की स्थिति में दहन का कार्य न करें. वन क्षेत्रों में शहद, महुआ के फूल अथवा अन्य किसी भी गैर प्रकाष्ठ वन उत्पाद के संग्रहण के लिए आग का प्रयोग न करें.

कानूनी प्रावधान और चेतावनी

जानबूझकर वन क्षेत्र में आग लगाने पर भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26(1) के तहत कठोर दंड का प्रावधान है। वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे जिम्मेदार नागरिक बनकर अग्नि से सुरक्षा को सर्वोच्च महत्व दें और वनों की रक्षा में सक्रिय सहयोग करें।