Satellite study
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रायपुर 10 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / Satellite study: Uttarakhand’s vegetation is in danger, climate change is affecting mountain ecosystems./ उत्तराखंड वनस्पति खतरा अध्ययन , विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत किए गए एक नए अध्ययन में उपग्रह आंकड़ों के माध्यम से उत्तराखंड की पहाड़ियों में वनस्पति क्षेत्र के लगातार सिकुड़ने की चेतावनी दी गई है। हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं, जहां तापमान वृद्धि, वर्षा पैटर्न में बदलाव और मौसम की अनिश्चितता का सीधा असर वनस्पति पर पड़ रहा है।

गूगल अर्थ इंजन से 22 वर्षों का विश्लेषण

नैनीताल स्थित आर्यभट्ट अवलोकन विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एआरआईईएस) के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2001 से 2022 तक गूगल अर्थ इंजन की मदद से उत्तराखंड की वनस्पति, प्रदूषण और जलवायु प्रभावों का अध्ययन किया।इस शोध में उपग्रह आधारित एनडीवीआई और ईवीआई जैसे सूचकांकों का उपयोग कर हरियाली, पौधों की सघनता और स्वास्थ्य का आकलन किया गया।

मौसमी बदलाव और घटती हरियाली

अध्ययन के अनुसार मानसून के बाद वनस्पति सबसे अधिक पाई गई, जबकि मानसून से पहले यह सबसे कम रही।

पिछले दो दशकों में प्राकृतिक संतुलन में स्पष्ट बदलाव देखने को मिला है, जिससे वन क्षेत्रों के रंग, घास के मैदान और घाटियों की वनस्पति प्रभावित हुई है।

मानव गतिविधियां बढ़ा रहीं संकट

जंगलों की कटाई, कृषि विस्तार, अवैध लकड़ी कटान, शहरीकरण और औद्योगिक प्रदूषण के कारण वनस्पति क्षेत्र में कमी आई है।

ये परिवर्तन जैव विविधता, जल संसाधनों और निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के जीवन पर खतरा पैदा कर रहे हैं।

उपग्रह विज्ञान बनेगा चेतावनी प्रणाली

शोधकर्ताओं के अनुसार आधुनिक उपग्रह तकनीक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में काम कर सकती है, जिससे नीति निर्माताओं को समय रहते जरूरी कदम उठाने में मदद मिलेगी।