रायपुर 22 फरवरी 2026 / ETrendingIndia / “The Municipal Corporation is not a profiteer, it is a public servant” – Raipur Mayor Meenal Choubey, raised the demand for relief in electricity rates before the Electricity Regulator / रायपुर बिजली दर राहत मांग , राजधानी रायपुर में बढ़ते बिजली बिलों को लेकर नगर निगम ने बड़ा मुद्दा उठाया है। महापौर मीनल चौबे ने साफ शब्दों में कहा है कि रायपुर नगर पालिक निगम कोई व्यवसायिक संस्था नहीं, बल्कि जनसेवी संस्था है, जिसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं बल्कि शहर को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। ऐसे में उसे व्यवसायिक बिजली दरों की श्रेणी में रखना न केवल अनुचित है, बल्कि जनहित के खिलाफ भी है।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग की सलाहकार समिति की बैठक में शामिल होकर महापौर ने कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि नगर निगम को ग्रॉस सब्सिडाइजेशन श्रेणी में न रखा जाए और व्यवसायिक टैरिफ से बाहर किया जाए।
उनका तर्क था कि नगर निगम शहर में स्ट्रीट लाइट, वाटर पंप, सार्वजनिक शौचालय और अन्य बुनियादी सेवाओं का संचालन करता है, जिन पर कमर्शियल टैरिफ लगाना व्यवहारिक नहीं है। इन सेवाओं के लिए ‘पब्लिक यूटिलिटी स्लैब’ बनाया जाना चाहिए, जिसकी दरें घरेलू दरों के समान हों।
महापौर ने आयोग के समक्ष यह भी प्रस्ताव रखा कि वर्तमान 7.35 रुपये प्रति यूनिट की दर को घटाकर 5.10 रुपये प्रति यूनिट किया जाए। उन्होंने बताया कि अधिक बिजली बिल के कारण निगम को सफाई, पेयजल और अन्य आवश्यक नागरिक सेवाओं के बजट में कटौती करनी पड़ रही है, जिससे सीधे तौर पर आम नागरिक प्रभावित हो रहे हैं।
300 करोड़ रुपये का बिजली बिल
महापौर के अनुसार, नगर निगम पर लगभग 300 करोड़ रुपये का बिजली बिल और उस पर करीब 50 करोड़ रुपये का सरचार्ज भार के रूप में है। यदि यह बोझ कम नहीं हुआ, तो अंततः इसकी भरपाई यूजर चार्ज और संपत्ति कर के माध्यम से जनता की जेब से ही करनी पड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम को राहत मिलने पर वह ऊर्जा बचत की दिशा में भी बेहतर कदम उठा सकेगा।
महापौर मीनल चौबे की यह पहल शहर की बुनियादी सेवाओं को बचाए रखने और जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़ने देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि विद्युत नियामक आयोग नगर निगम की इन मांगों पर क्या निर्णय लेता है।
