trade war
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रायपुर ,25 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / Trump’s ‘trade war’ suffers major setback, SC decision to halt tariff collection tomorrow / ट्रंप टैरिफ वसूली बंद , डोनाल्ड ट्रंप के जिस रेसिप्रोकल टैरिफ ने पूरी दुनिया में ट्रेड वॉर की स्थिति पैदा कर दी थी, उस पर अब आधिकारिक तौर पर रोक लगने जा रही है। बीते शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन शुल्कों को गैरकानूनी करार दिए जाने के बाद एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा विभाग ने घोषणा की है कि अदालत के फैसले का पालन करते हुए मंगलवार से इन अतिरिक्त शुल्कों की वसूली पूरी तरह से रोक दी जाएगी।

ढ्ढश्वश्वक्क्र के तहत लगाए गए टैरिफ कोड होंगे निष्क्रिय
अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, साल 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (ढ्ढश्वश्वक्क्र) के तहत की जा रही टैरिफ वसूली मंगलवार को बंद कर दी जाएगी। यह रोक अमेरिकी समयानुसार रात 12.01 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 10.30 बजे) से प्रभावी होगी।

विभाग ने आयातकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि उनके कार्गो सिस्टम में सभी संबंधित ड्यूटी कोड (ष्ठह्वह्ल4 ष्टशस्रद्ग) तय समय से निष्क्रिय कर दिए जाएंगे।

ट्रंप के अन्य शुल्कों पर नहीं पड़ेगा असर

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बीते सप्ताह शुक्रवार को आया था, जिसके महज तीन दिन बाद ही प्रशासन ने टैरिफ वसूली पर रोक का ऐलान कर दिया है।

हालांकि, यह निलंबन केवल ढ्ढश्वश्वक्क्र के तहत लगाए गए टैरिफ पर ही लागू होगा। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में धारा 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा शक्तियों) और धारा 301 (अनुचित व्यापार कानूनों) के तहत लगाए गए अन्य शुल्कों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने ट्रंप के व्यापार एजेंडे के उस प्रमुख हिस्से पर अचानक ब्रेक लगा दिया है, जिसने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया था और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के साथ विवादों को जन्म दिया था।

175 अरब डॉलर की कमाई, अब रिफंड पर फंसा पेंच

सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईईईपीए के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद अब एक नया आर्थिक पेंच फंस गया है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस ऐतिहासिक फैसले से अमेरिका पर 175 अरब डॉलर से अधिक के टैरिफ राजस्व को वापस करने का दबाव बन सकता है। इन गैरकानूनी करार दिए गए शुल्कों से प्रतिदिन 500 मिलियन डॉलर से अधिक की कमाई हो रही थी। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि टैरिफ के रूप में वसूली गई यह भारी-भरकम रकम आयातकों को रिफंड की जाएगी या नहीं।