रायपुर, 09 मार्च 2026/ ETrendingIndia / MLA Bhavna Bohra raised the issue of discrepancy in paddy procurement and payment, nutrition of pregnant mother and child, pension and payment of outstanding salaries of computer operators./ भावना बोहरा विधानसभा मुद्दा , विधानसभा सत्र के दौरान पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने जनहित व किसानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न किया। उन्होंने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी व भुगतान में अनियमितता ,गर्भवती माता और शिशु के पोषण, वृद्धा एवं विधवा और दिव्यांग पेंशन तथा धान खरीदी केन्द्रों में कंप्यूटर ऑपरेटरों के बकाया भुगतान तथा प्रदेश में कुपोषण व क्षयकारी बच्चों की गंभीर समस्या के विषय में प्रश्न किया।
भावना बोहरा ने पूछा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और ई-केवाईसी सर्वर में तकनीकी खराबी के कारण कितने किसान अपना पंजीकरण नहीं करा पाए हैं या उन्हें टोकन मिलने में विलंब हुआ है? राज्य सरकार द्वारा सीमावर्ती राज्यों से आने वाले अवैध धान को रोकने के लिए सीमा पर अब तक क्या कार्यवाही की गई है? क्या विभाग उन बिचौलियों की सूची पटल पर रखेगा जिनके विरुद्ध मंडी अधिनियम के तहत पिछले 2 महीनों में कार्यवाही की गई है?
जिसके लिखित उत्तर में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल जी ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 15 नवंबर 2025 से राज्य में शुरू हुई धान खरीदी नीति के तहत कुल 141.04 लाख मेट्रिक टन की खरीदी की गई है। किसानों को समर्थन मूल्य की राशि धान कॉमन हेतु राशि रूपए 2369 तथा धान ग्रेड- ए हेतु राशि रूपए 2389 प्रति क्विंटल की दर से किसानों के खाते में भुगतान किया गया है।
तकनीकी सुविधा का उपयोग करते हुए किसानों के द्वारा धान बिक्री हेतु पंजीयन कराया गया तथा उनको नियमानुसार टोकन प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार द्वारा सीमावर्ती राज्यों से लगने वाले जिलों में चेकपोस्ट बनाया गया था तथा मंडी अधिनियम के तहत कोचिए एवं बिचौलियों के विरूद्ध कार्यवाही की गई है।
भावना बोहरा ने पूछा कि क्या समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों के 108 खरीदी केंद्रों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटरों से कार्य लिया गया, परंतु उन्हें निर्धारित अवधि का मानदेय/वेतन भुगतान नहीं किया गया? यदि हाँ, तो संबंधित ऑपरेटरों को अब तक वेतन भुगतान न होने के क्या कारण हैं तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों/एजेंसी के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई है? क्या हड़ताल की स्थिति समाप्त होने के पश्चात उक्त आउटसोर्सिंग ऑपरेटरों से लगभग 15 दिनों तक कार्य लेने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं? क्या शासन द्वारा प्रभावित उक्त कंप्यूटर ऑपरेटरों को उनका बकाया भुगतान शीघ्र दिलाने एवं भविष्य में इस प्रकार की स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने हेतु कोई ठोस निर्देश या नीति जारी करने का विचार है?
जिसके लिखित उत्तर में खाद्य मंत्री ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों के खरीदी केंद्रों में पूर्व में कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटर हड़ताल में होने के कारण आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से जिला कलेक्टर से समन्वय कर कंप्यूटर ऑपरेटरों से कार्य कराया गया। आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को निर्धारित अवधि का मानदेय वेतन भुगतान हेतु विपणन संघ कार्यालय को देयक/बिल प्रस्तुत नहीं किया गया है। शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान उपार्जन हेतु जारी नीति की कंडिका 11.3 अनुसार समितियों द्वारा जिलों द्वारा कम्प्यूटर आपरेटरों से कार्य कराया गया। धान खरीदी नीति 2025-26 में आवश्यक प्रावधान किया गया है।
श्रीमती भावना बोहरा के एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि कबीरधाम जिले में सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं में पंजीकृत वृद्ध, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन के कुल 82,844 हितग्राही हैं जिनमें से कवर्धा विधानसभा में 38000 एवं पंडरिया विधानसभा में 44, 844 हितग्राही हैं। वर्तमान में पेंशन स्वीकृति हेतु कोई भी प्रकरण लंबित नहीं है।
पेंशन योजनाओं में स्वीकृति एवं पेंशन राशि के भुगतान को सरल तथा पारदर्शी बनाने हेतु समस्त प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया गया है। हितग्राही स्वयं अथवा लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। स्वीकृति एवं भुगतान भी ऑनलाइन होती है। हितग्राहियों के डाटाबेस भारत सरकार के हृस््रक्क पोर्टल में संधारित है।
इसी तरह विधायक भावना बोहरा के एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री ने बतया कि कबीरधाम जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों में हितग्राहियों को प्रदाय किये जा रहे पोषण आहार संबंधी शिकायत प्राप्त हुई है। विगत 03 वर्षो में विधानसभा क्षेत्र पंडरिया में पोषण आहार संबंधी 02 शिकायते प्राप्त हुई है तथा दोनो प्रकरणों की जांच कराई गई। जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई।
