Zayed crops
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रायपुर 26 अप्रैल 2026/ ETrendingIndia / Sow Zayed crops in April-May, cost less-benefit more: Agriculture Minister Shri Kanshana / जायद फसल बुवाई अप्रैल मई , मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जायद सीजन में किसानों की आय बढ़ाने के लिए किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने विशेष कार्ययोजना तैयार की है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि अप्रैल और मई माह में बोई जाने वाली फसलों से किसान कम समय और कम पानी में बेहतर मुनाफा ले सकते हैं।

अप्रैल-मई में बोई जाने वाली प्रमुख फसलें एवं कृषि सलाह

जायद सीजन में मूंग की विराट, शिखा, टीजेएम-3 एवं हम-16 किस्मों की बुवाई 15 मई तक की जा सकती है।

बुवाई से पहले बीज को रायजोबियम एवं पीएसबी कल्चर से उपचारित करना लाभकारी रहता है और इस फसल में 4 से 5 सिंचाई पर्याप्त होती है।

उड़द की इंदिरा उड़द-1, टी-9 एवं प्रताप उड़द-1 किस्मों को हल्की-दोमट मिट्टी में बोना चाहिए तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करना आवश्यक है।

मक्का की जेएम-216, एचएम-4 तथा संकर किस्मों की बुवाई करने पर 5 से 6 सिंचाई की आवश्यकता होती है और बेबीकॉर्न के लिए 65 दिन में तुड़ाई कर किसान अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं।

सूरजमुखी की केबीएसएच-44 एवं डीआरएसएच-1 किस्में 3 से 4 सिंचाई में तैयार हो जाती हैं तथा परागण बढ़ाने के लिए खेत के पास मधुमक्खी पालन करने से उत्पादन 20 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

सब्जी वर्ग में भिंडी, लौकी, करेला, तोरई की संकर किस्में लगाना चाहिए और पानी की बचत के लिए ड्रिप सिंचाई व मल्चिंग अपनाना चाहिए।

स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार ही फसल का चयन करना बेहतर रहता है।

पशुपालक किसान चारे के लिए मक्का की अफ्रीकन टॉल एवं ज्वार की एमपी चरी किस्म बो सकते हैं। ये फसलें 45 दिन में हरा चारा उपलब्ध करा देती हैं और चारा बीज पर शासन द्वारा 75 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है।

शासन द्वारा दी जा रही प्रमुख सुविधाएं

जायद फसलों को बढ़ावा देने के लिए मूंग-उड़द के प्रमाणित बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है और प्रदेश में इस सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज भंडारित किया गया है।

रायजोबियम कल्चर सभी विकासखंडों में निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। सिंचाई के लिए ‘पर ड्रॉप-मोर क्रॉप’ योजना में ड्रिप व स्प्रिंकलर पर 55 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है तथा पात्र किसानों को सोलर पंप 90 प्रतिशत तक अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिये रोटावेटर, कल्टीवेटर, बीज-उर्वरक ड्रिल पर 40 से 50 प्रतिशत अनुदान है और प्रदेश में स्थापित 2,500 कस्टम हायरिंग सेंटर से किसान किराये पर मशीनें ले सकते हैं।

तकनीकी मार्गदर्शन के लिए हर विकासखंड में ‘कृषि चौपाल’ व ‘किसान पाठशाला’ के माध्यम से विशेषज्ञ सलाह दी जा रही है तथा ‘एमपी किसान ऐप’ पर मौसम आधारित सलाह व मंडी भाव की जानकारी तुरंत मिल रही है।

विपणन के लिए ‘मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ’ द्वारा मूंग एवं उड़द का उपार्जन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किया जाएगा।

एफपीओ के माध्यम से किसानों को सीधा बाजार लिंकेज दिया जा रहा है। जोखिम से बचाव के लिए जायद फसलों को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में शामिल किया गया है और नुकसान होने पर 72 घंटे में सर्वे की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

बिजली के लिए कृषि पंपों को 10 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली दी जा रही है तथा जायद फसल के लिए अस्थायी कनेक्शन 3 दिन में उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कृषि मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा जायद फसलों की बुवाई, उन्नत तकनीक, अनुदान योजनाओं एवं नरवाई प्रबंधन से संबंधित संपूर्ण जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.mpkrishi.mp.gov.in पर उपलब्ध कराई गई है।

वेबसाइट के होमपेज पर ‘जायद फसल विशेष’ सेक्शन में फसलवार पैकेज ऑफ प्रैक्टिस, बीज उपलब्धता, एमएसपी पर ई-उपार्जन पंजीयन की तिथि, अनुदान के लिए आवेदन प्रक्रिया तथा जिलेवार कृषि विशेषज्ञों के नंबर भी प्रकाशित किए गए हैं।

किसान भाई ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ व ‘ई-उपार्जन पोर्टल’ का लिंक भी वेबसाइट से प्राप्त कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

मंत्री श्री कंषाना ने किसानों से कहा कि जायद फसलें 60 से 70 दिन में तैयार होकर खरीफ से पहले खेत खाली कर देती हैं और दलहनी होने के कारण मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती हैं। उन्होंने किसानों से नरवाई न जलाने और उसे खेत में मिलाकर जायद की बुवाई करने की अपील की है।

मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि विभाग का हर अधिकारी किसानों की मदद के लिए तैयार है। किसी भी समस्या के लिए किसान कॉल सेंटर टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर संपर्क कर सकते हैं।