Civil Services Examination 2025
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रायपुर 18 अप्रैल 2026 / ETrendingIndia / Civil Services Examination 2025: One-third of successful participants are women, wider participation – gender, region and social backgrounds becoming more inclusive – Union Minister Dr. Jitendra Singh / सिविल सेवा परीक्षा 2025 महिलाएं , विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि उनकी हिस्सेदारी अब 31 प्रतिशत से अधिक हो गई है और कुल सफल उम्मीदवारों के एक तिहाई की ओर लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव पिछले एक दशक में प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और समान अवसर प्रदान करने के कारण अवसरों की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।

‘शेयर इंडिया स्माइल फाउंडेशन’ द्वारा “मिशन आईएएस” पहल के अंतर्गत सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2025 के सफल प्रतिभागियों के लिए आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सिविल सेवाओं की बदलती लैंगिक संरचना भारत के विकसित होते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य के सबसे उत्साहजनक संकेतकों में से एक है।

उन्होंने कहा कि लगभग एक दशक पहले, सफल प्रतिभागियों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत थी, जबकि अब यह 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो एक निर्णायक परिवर्तन का संकेत है।

नवीनतम सिविल सेवा परीक्षा- 2025 के आंकड़ों के अनुसार, 958 अनुशंसित उम्मीदवारों में से 299 महिलाएं हैं, जो कुल का 31 प्रतिशत से अधिक हैं।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा कि यह निरंतर वृद्धि न केवल युवा महिलाओं की बढ़ती आकांक्षाओं को दर्शाती है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों में संसाधनों, सूचनाओं और अवसरों तक बेहतर पहुंच को भी दर्शाती है।

सिविल सेवा अब अभिजात वर्ग या सीमित भौगोलिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सिविल सेवा अब चुनिंदा अभिजात वर्ग या सीमित भौगोलिक क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आज के उम्मीदवार विविध पृष्ठभूमियों से आ रहे हैं, जिनमें दूर-दराज़ और वंचित क्षेत्र भी शामिल हैं, और अक्सर उन्हें पारंपरिक कोचिंग सहायता नहीं मिलती है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, सूचना की उपलब्धता और स्व-अध्ययन उपकरणों के प्रसार ने पारंपरिक प्रणालियों पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है।

छोटे शहरों और विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमियों के उम्मीदवार अब शीर्ष रैंक हासिल कर रहे हैं

परीक्षा परिदृश्य में व्यापक बदलावों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा कि क्षेत्र, लैंगिक और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि – इन तीन आयामों में स्पष्ट बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों और विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमियों के उम्मीदवार अब शीर्ष रैंक हासिल कर रहे हैं, जो एक अधिक समावेशी और प्रतिनिधि प्रणाली को दर्शाता है।

अपनी योग्यता को पहचाने

केंद्रीय मंत्री महोदय ने अपनी योग्यता को पहचानने और उसे करियर विकल्पों के साथ जोड़ने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जैसे सुधारों ने विद्यार्थियों को मजबूरी के बजाय रुचि और क्षमता के आधार पर विषयों का अध्ययन करने के लिए सुगमता और स्वतंत्रता प्रदान की है।

“प्रतिभा सेतु” मंच

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकारी पहलों पर प्रकाश डालते हुए “प्रतिभा सेतु” मंच का जिक्र किया, जो साक्षात्कार चरण तक पहुंचने वाले लेकिन अंतिम चयन में शामिल न हो पाने वाले उम्मीदवारों को सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के संभावित नियोक्ताओं से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रतिभा व्यर्थ न जाए और उत्पादक रूप से योगदान देती रहे।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने सिविल सेवकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास में हुए बदलावों के बारे में भी बात की, जिनमें कैडर आवंटन से पहले केंद्रीय मंत्रालयों से संपर्क और मिशन कर्मयोगी के माध्यम से निरंतर सीखना शामिल है।

अधिकारियों को जनता, मीडिया और राजनीतिक नेतृत्व से सीधे जुड़ना आवश्यक

उन्होंने कहा कि आज के सुशासन में अधिकारियों को जनता, मीडिया और राजनीतिक नेतृत्व से सीधे जुड़ना आवश्यक है, जिससे अनुकूलन और संचार कौशल अनिवार्य हो गए हैं।

सत्यनिष्ठा लोक सेवा का मूल मंत्र

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सत्यनिष्ठा लोक सेवा का मूल मंत्र है और इसे व्यवहार और धारणा दोनों में बनाए रखना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिविल सेवकों को जमीनी स्तर पर बने रहना चाहिए और अपने पूरे करियर में निरंतर सीखते रहना चाहिए।