Iranian oil
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रायपुर,08 मई 2026 / ETrendingIndia / ईरानी तेल प्रतिबंध पर चीन का बड़ा कदम, अमेरिका के खिलाफ खुली चुनौती

ईरान से तेल खरीद को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अब ईरानी तेल प्रतिबंध को लेकर चीन ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों को नजरअंदाज करने का निर्देश दिया है। इससे ट्रंप प्रशासन की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति को बड़ा झटका माना जा रहा है।


चीन ने 2021 के ब्लॉकिंग कानून का किया इस्तेमाल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने अपने 2021 के “ब्लॉकिंग स्टैच्यूट” का इस्तेमाल किया है। यह कानून चीनी कंपनियों को उन विदेशी प्रतिबंधों का पालन करने से रोकता है, जिन्हें बीजिंग अवैध मानता है।

यह आदेश खासतौर पर उन चीनी रिफाइनरियों पर लागू किया गया है, जिन पर ईरानी कच्चा तेल खरीदने के आरोप लगे हैं। इनमें कई स्वतंत्र “टीपॉट” रिफाइनरी भी शामिल हैं।


ट्रंप प्रशासन ने चीन पर लगाए गंभीर आरोप

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चीन पर ईरान की आर्थिक मदद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चीन, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और इसी कारण वह अप्रत्यक्ष रूप से ईरान की सैन्य गतिविधियों को फंड कर रहा है।

इसके अलावा, उन्होंने चीन से कूटनीतिक भूमिका निभाने और ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दबाव बनाने की मांग की।


चीन अब भी ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार

कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन, ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी कच्चा तेल जटिल समुद्री नेटवर्क और अप्रत्यक्ष शिपिंग चैनलों के जरिए चीन पहुंच रहा है।

हालांकि अमेरिका लगातार प्रतिबंध और निगरानी बढ़ा रहा है, लेकिन चीन ने अपने रुख में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं।