Share This Article रायपुर, 13 मई 2026/ ETrendingIndia / Donald Trump arrives in China, Elon Musk-Team Cook together; many issues will be discussed / ट्रंप चीन दौरा , अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बहुप्रतीक्षित दौरे पर चीन पहुंच गए हैं। वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान चर्चा का केंद्र दोनों देशों के बीच व्यापार होगा। ट्रंप के साथ शीर्ष तकनीकी कंपनियों के अधिकारी भी चीन जा रहे हैं। इनमें एपल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक, टेस्ला के एलन मस्क और एनवीडिया के जेनसन हुआंग भी शामिल हैं। ट्रंप के दौरे की शुरुआत 14 मई की सुबह ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल्स’ में स्वागत समारोह के साथ होगी। यह बीजिंग का विशाल राजकीय स्थल है, जहां अक्सर राजनीतिक बैठकें और औपचारिक समारोह होते हैं। इसके बाद शी जिनपिंग की मौजूदगी में ट्रंप को तियानमेन स्क्वायर में 21 तोपों की सलामी के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। दोपहर में दोनों नेता ‘टेंपल ऑफ हेवन’ जाएंगे। 15 मई को ट्रंप और शी के बीच बैठक होगी। बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी, एआई, ईरान से जुड़े मुद्दे, व्यापार और ताइवान हथियार पैकेज जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखलाओं के मुद्दों पर चर्चा होगी। अमेरिका ने चीन को जाने वाले उन्नत चिप्स और उपकरणों पर प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं। वहीं, चीन का लगभग 90 प्रतिशत दुर्लभ खनिजों पर कब्जा है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के लिए जरूरी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप व्यापार पर ध्यान केंद्रित करेंगे। ट्रंप के साथ एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का जाना इसका संकेत है। दोनों देशों में 28 लाख करोड़ रुपये के संभावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। अमेरिका ने चीन पर बोइंग विमान और सोयाबीन सहित अमेरिकी वस्तुओं की खरीद बढ़ाने का दबाव डाला है। वहीं, चीन सेमीकंडक्टर निर्यात पर प्रतिबंधों में ढील की मांग कर सकता है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका चीन से ईरान पर दबाव डालने का अनुरोध कर सकता है, क्योंकि चीन ईरान के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और सुरक्षित करने के प्रयासों का समर्थन करने का भी आग्रह किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान मुद्दे पर अमेरिका और चीन के साझा हित हैं, क्योंकि दोनों देशों को खाड़ी के माध्यम से स्थिर ऊर्जा प्रवाह से लाभ होता है। ताइवान अमेरिका और चीन के बीच विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने जिनपिंग से इस मुद्दे पर बात की थी। ताइवान के आसपास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और ताइवानी राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते के शासनकाल में ये विवाद और बढ़ा है। वहीं, टैरिफ पर भी चर्चा होगी। पिछले साल ट्रंप ने कुछ चीनी सामानों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया था। Share This Article Post navigation NEET-UG 2026 रद्द होने पर खान सर का NTA पर हमला: कहा- ‘छात्रों का आत्मविश्वास तोड़ा जा रहा है ईटीजीई की ट्रंप से अपील, जिनपिंग के सामने उठाएं ईस्ट तुर्किस्तान और तिब्बत का मुद्दा