Iran-US agreement
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रायपुर, 23 जून 2026/ ETrendingIndia / “Impact of Iran-US agreement: 11 India-bound ships pass safely through the Strait of Hormuz, big relief for India” हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य

नई दिल्ली। भारत-हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद 11 भारत-गामी जहाज सफलतापूर्वक हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि समुद्री मार्ग पर फिलहाल आवाजाही सामान्य बनी हुई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि 17 जून को हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद जहाजों की आवाजाही लगातार जारी है। इससे भारत के ऊर्जा आयात और व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिली है।

कच्चे तेल और एलपीजी से जुड़े जहाज भी शामिल

भारत-हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से गुजरने वाले जहाजों में तीन भारतीय ध्वज वाले बड़े कच्चा तेल टैंकर शामिल हैं। इनमें प्रत्येक जहाज 2.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लेकर आ रहा है।

इसके अलावा एक एलपीजी कैरियर, एक विदेशी ध्वज वाला क्रूड ऑयल टैंकर तथा छह बल्क कैरियर भी इस मार्ग से सुरक्षित गुजरे हैं। ये जहाज उर्वरक सहित महत्वपूर्ण सामान लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।

अभी भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं भारतीय जहाज

विदेश मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में 10 भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं। वहीं हाल ही में दो अन्य भारतीय जहाज भी इस क्षेत्र में पहुंचे हैं।

सरकार को उम्मीद है कि शेष जहाज भी जल्द ही भारत-हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से सुरक्षित निकल जाएंगे। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात व्यवस्था पर किसी प्रकार का बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

भारत-यूएई रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चर्चा

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मजबूत हो रहे रक्षा सहयोग का भी उल्लेख किया। मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

इसके अलावा बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़ी घटनाओं और भारत-चीन संबंधों पर भी चर्चा की गई। सरकार ने क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात दोहराई।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है हॉर्मुज जलडमरूमध्य?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस वैश्विक बाजारों तक पहुंचती है। इसलिए इस क्षेत्र में स्थिरता भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए बेहद अहम मानी जाती है।