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रायपुर, 24 मई 2026/ ETrendingIndia / Big action to bring Tandula river into original form: Removed illegal occupation, 7.5 acres of government land to be encroachment free / तांदुला नदी अतिक्रमण हटाना , बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी को उसके वास्तविक और मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम सिवनी और देउरतराई क्षेत्र में तांदुला नदी के तट पर किए गए व्यापक अवैध कब्जे को हटाने के लिए आज अलसुबह से ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमला मैदान में उतर चुका है।

14 अतिक्रमणकारियों को हटाने की कार्रवाई

       तहसीलदार द्वारा सभी 14 चिन्हित अतिक्रमणकारियों को 24 घंटे के भीतर स्वेच्छा से कब्जा हटाने का कड़ा नोटिस (अल्टीमेटम) जारी किया गया था। समय-सीमा समाप्त होते ही आज सुबह 05.30 बजे से राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर मलबे और अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई शुरू कर दी।

ड्रोन सर्वे से खुलासा- 220 मीटर की नदी सिकुड़कर 80 मीटर

      राजस्व विभाग की सघन जांच और हाईटेक ड्रोन सर्वे में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि जो तांदुला नदी मूल रूप से 220 मीटर चौड़ी थी, वह अवैध कब्जों और खेती के कारण कई स्थानों पर सिकुड़कर मात्र 80 से 90 मीटर ही रह गई थी। जांच में यह भी प्रमाणित हुआ है कि अधिकांश अतिक्रमणकारी आर्थिक रूप से सक्षम हैं। उनके पास अन्य स्थानों पर स्वयं की भूमियां हैं और वे किराना दुकान, सैलून जैसे मुख्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाते हैं।

कुछ रसूखदारों द्वारा नदी की इस शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर इसे दूसरों को श्रेगहाश् (बटाई/किराए) पर देने का मामला भी उजागर हुआ है।

साढ़े सात एकड़ में समतलीकरण, बढ़ेगी जल संचय क्षमता

      प्रशासन द्वारा नदी क्षेत्र की लगभग साढ़े सात एकड़ भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए खेतों की मेड़ों को पोकलेन और जेसीबी मशीनों के माध्यम से तोड़ा जा रहा है। इन खेतों को नदी के समानांतर समतल करने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। 

समतलीकरण पूर्ण होने के बाद इस पूरे डूब क्षेत्र में जलभराव किया जाएगा, जिससे तांदुला नदी को उसकी पुरानी जल संचय क्षमता और प्राकृतिक सौंदर्य वापस मिल सकेगा।

फसल कटते ही प्रशासन ने की त्वरित कार्रवाई

      उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले भी प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र में अतिक्रमण विरोधी मुहिम शुरू की गई थी। उस समय खेतों में ग्रीष्मकालीन धान की खड़ी फसल होने के कारण मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई को अस्थाई रूप से रोक दिया गया था। अब चूंकि धान की फसल कट चुकी है, प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए पुनः इस सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है।

मौके पर तैनात रहा आला प्रशासनिक अमला

     तांदुला नदी के अस्तित्व और पर्यावरण को बचाने के लिए यह कड़ा कदम उठाना बेहद अपरिहार्य हो गया था। कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, थाना प्रभारी, ट्रैफिक टीआई पुलिस विभाग के अधिकारी तथा जल संसाधन विभाग के अधिकारी सहित तीनों विभागों के सैकड़ों कर्मचारी और तकनीकी स्टाफ मौके पर मुस्तैद रहे।