Changed thinking in 10 years
Changed thinking in 10 years
Share This Article

रायपुर 26 मई 2026/ ETrendingIndia / Changed thinking in 10 years: increased acceptance in society over second marriage / दूसरी शादी स्वीकार्यता , भारत में तलाक, विधवापन और जीवनसाथी से अलगाव के बाद दोबारा शादी को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है। पहले जहां दूसरी शादी को समाज में संकोच और आलोचना की नजर से देखा जाता था, वहीं अब लोग इसे नई शुरुआत और बेहतर जीवन का अवसर मानने लगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स, वैवाहिक वेबसाइटों और सामाजिक अध्ययनों के अनुसार पिछले एक दशक में दूसरी शादी के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है।

28% तलाकशुदा लोगों को मिली नई राह

रिपोर्टों के अनुसार करीब 28 प्रतिशत तलाकशुदा लोग दोबारा जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं। महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी पुनर्विवाह को लेकर सकारात्मक माहौल बना है। परिवार भी अब पहले की तुलना में ज्यादा सहयोग कर रहे हैं।

10 साल में बढ़े दूसरी शादी के मामले

मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म्स के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दस वर्षों में दूसरी शादी करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

वर्ष 2016 की तुलना में 2025 तक ऐसे प्रोफाइलों में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। हर छह सफल शादियों में अब एक शादी पुनर्विवाह की बताई जा रही है।

महिलाओं में भी बढ़ा आत्मविश्वास

पहले तलाक या पति की मृत्यु के बाद महिलाएं दोबारा शादी से हिचकिचाती थीं, लेकिन अब शिक्षित और आत्मनिर्भर महिलाओं में नई शुरुआत का आत्मविश्वास बढ़ा है।

कई महिलाएं अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और भावनात्मक सहारे के लिए पुनर्विवाह को स्वीकार कर रही हैं।

ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म बने सहारा

दूसरी शादी के लिए अब लोग ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट्स और मोबाइल ऐप का अधिक उपयोग कर रहे हैं। कई प्लेटफॉर्म तलाकशुदा, विधवा और विधुर लोगों के लिए अलग श्रेणियां और विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहे हैं। इससे समान परिस्थिति वाले लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने में आसानी हो रही है।

समाज की सोच में आया बदला

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, आर्थिक आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता ने लोगों की सोच बदली है। अब शादी को केवल सामाजिक बंधन नहीं बल्कि भावनात्मक सहयोग और समझदारी के रिश्ते के रूप में देखा जा रहा है।

परिवार और बच्चों का भी मिल रहा समर्थन

कई मामलों में परिवार अब पुनर्विवाह के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। बच्चों की सहमति और समर्थन भी पहले की तुलना में बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ पारिवारिक माहौल और भावनात्मक स्थिरता के लिए पुनर्विवाह कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

छोटे शहरों में भी बढ़ रही स्वीकार्यता

पहले पुनर्विवाह का चलन मुख्य रूप से महानगरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब रायपुर, इंदौर, जयपुर, लखनऊ और नागपुर जैसे शहरों में भी लोग खुलकर दूसरी शादी को स्वीकार कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे सामाजिक झिझक कम हो रही है।

विशेषज्ञों की राय

समाजशास्त्रियों के अनुसार बदलते समय में लोगों ने यह समझना शुरू किया है कि असफल विवाह जीवन का अंत नहीं है। मानसिक शांति, सम्मान और बेहतर जीवन के लिए नई शुरुआत करना अब सामान्य माना जाने लगा है।