रायपुर ,29 मई 2026/ ETrendingIndia / Beware! WiFi installed at home can cause your tracking, new threat / WiFi ट्रैकिंग खतरा , दुनियाभर में डिजिटल प्राइवेसी और निगरानी को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। जर्मनी के वैज्ञानिकों ने ऐसा दावा किया है जिसने इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रिसर्च के मुताबिक, अब साधारण राउटर भी बिना कैमरे और बिना किसी स्मार्ट डिवाइस के लोगों की गतिविधियों को ट्रैक कर सकते हैं।
सिग्नल से इंसानों की निगरानी
जर्मनी के कार्लसरुहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है, । यह तकनीक नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले फीचर इंटरनेट सिग्नल को बेहतर बनाने के लिए जोड़ा गया था। लेकिन रिसर्चर्स का कहना है कि यही सिग्नल अब लोगों की मूवमेंट और बॉडी पैटर्न को पहचानने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
बिना कैमरे के बन रही ‘रेडियो इमेज’
शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग और मॉडल्स की मदद से इंसानी शरीर की रेडियो इमेज तैयार करने का तरीका विकसित किया। यह तकनीक रोशनी की जगह रेडियो वेव्स का इस्तेमाल करती है।
जब कोई व्यक्ति कमरे में चलता है, तो उसके शरीर से वेव्स प्रभावित होती हैं। इन बदलावों को सिस्टम रिकॉर्ड करता है और फिर उस व्यक्ति की चाल, शरीर की बनावट और मूवमेंट पैटर्न के आधार पर उसकी पहचान कर लेता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 197 लोगों पर किए गए परीक्षण में इस तकनीक ने करीब 99.5 प्रतिशत तक सटीक पहचान करने का दावा किया है।
अब स्मार्टफोन भी जरूरी नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि किसी व्यक्ति के पास मोबाइल, स्मार्टवॉच या कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होना भी जरूरी नहीं है। केवल शरीर की हलचल से पैदा होने वाले रेडियो बदलावों के आधार पर उसकी मौजूदगी और गतिविधि को ट्रैक किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में सुरक्षा, निगरानी और डेटा प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
प्राइवेसी को क्यों माना जा रहा खतरा ?
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, भले ही सिग्नल सीधे किसी का नाम या पहचान न बताते हों, लेकिन यदि इन्हें लोकेशन हिस्ट्री, मोबाइल डेटा या अन्य डिजिटल रिकॉर्ड्स से जोड़ा जाए तो किसी भी व्यक्ति की पहचान आसानी से उजागर की जा सकती है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक स्थानों, ऑफिस, मॉल और भीड़भाड़ वाले इलाकों में इस तरह की निगरानी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। खासकर पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के लिए यह तकनीक गंभीर चिंता का विषय बन सकती है।
बचाव के लिए क्या करें?
रिसर्चर्स ने अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और रेगुलेटरी संस्थाओं से स्टैंडर्ड्स में मजबूत एन्क्रिप्शन और प्राइवेसी सुरक्षा जोडऩे की मांग की है।
जब तक नई सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक विशेषज्ञों ने लोगों को सार्वजनिक नेटवर्क इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने, राउटर के फर्मवेयर को अपडेट रखने और सुरक्षित नेटवर्क का उपयोग करने की सलाह दी है।
