रायपुर, 21 जून 2026/ Middle East Crisis: Iran-US talks in Switzerland today…! Discussions to focus on the nuclear deal and a ceasefire in Lebanon.
Middle East Crisis : स्विट्जरलैंड में आज ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होने जा रही है। इसमें शामिल होने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रवाना हो चुके हैं। वहीं, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधि पहले से स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं।
ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ कर रहे हैं और इसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं। शांति समझौते के भविष्य को लेकर ये वार्ता बेहद अहम मानी जा रही है।
वेंस ने स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले कहा, वाशिंगटन को परमाणु मुद्दे और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों दोनों पर प्रगति हासिल करने की उम्मीद है। ये 2 प्रमुख मुद्दे हैं जिन पर हम ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
वहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर तकनीकी स्तर की चर्चाओं में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद से रवाना हो चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, चारों देशों के प्रतिनिधिमंडल मध्य पूर्व के व्यापक संकट को हल करने के लिए 60-दिवसीय रोडमैप, युद्धविराम ढांचे के कार्यान्वयन और भविष्य के परमाणु समझौते पर प्रगति पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
सूत्रों ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में जारी शत्रुता के बीच दोनों पक्षों के वार्ताकार इस मुद्दे को सुलझाने पर सहमत हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल समझौते के तहत दूसरे पक्ष की प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन की मांग करेगा।
पहले दिन इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष पर केंद्रित एक आपातकालीन सत्र भी होगा। ये अमेरिकी रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि न तो इजरायल, न ही हिजबुल्लाह और न ही लेबनानी सरकार स्विट्जरलैंड वार्ता का हिस्सा हैं।
ईरान का कहना है कि युद्धविराम की शर्तों पर लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग रोकना शामिल है। वहीं, इजरायल लगातार लेबनान पर हमले किए जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर 60 दिनों के भीतर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ तो होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी टोल लगाए जा सकते हैं।
वहीं, युद्धविराम लागू होने के बाद 2 बार ईरान ने इसे बंद करने का दावा किया है। इसके पीछे लेबनान पर जारी इजरायली हमलों को वजह बताया गया है। ईरान का कहना है कि लेबनान पर इजरायली हमले युद्धविराम शर्तों का उल्लंघन हैं।
