Share This Article रायपुर, 26 जून 2026/ UCC Chhattisgarh: Preparations for the UCC gain momentum in Chhattisgarh! The Sai government has formed a high-level committee—find out what happens next. UCC Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में साय सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने UCC के अध्ययन, विभिन्न पहलुओं पर मंथन और प्रारूप तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दिया। जारी आदेश के अनुसार, समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। वहीं शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत और मोहन पवार को समिति का सदस्य बनाया गया है। ज्योति रानी सिंह समिति की महिला सदस्य होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर समिति के गठन की जानकारी साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार समान नागरिक संहिता के संबंध में व्यापक अध्ययन, विशेषज्ञों से परामर्श और सभी वर्गों से संवाद के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। छत्तीसगढ़ राज्य में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने एवं इसका प्रारूप तैयार करने राज्य शासन द्वारा समिति का गठन#UniformCivilCode#SushasanSarkar pic.twitter.com/jyOGTVoint— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) June 25, 2026 सरकार के इस फैसले को प्रदेश में UCC लागू करने की दिशा में शुरुआती लेकिन अहम कदम माना जा रहा है। समिति विभिन्न राज्यों के अनुभवों, कानूनी पहलुओं और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद सरकार आगे की रणनीति तय करेगी। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पहल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। समर्थक इसे समानता और एकरूपता की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि विभिन्न वर्गों की राय जानने पर भी जोर दिया जा रहा है। शादी से लेकर संपत्ति तक बदल सकते हैं कई नियम अगर छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होता है, तो इसका असर मुख्य रूप से विवाह, तलाक, भरण-पोषण, गोद लेने और संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े निजी कानूनों पर पड़ सकता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि समिति क्या सिफारिश करती है और सरकार अंतिम कानून में क्या प्रावधान शामिल करती है। 1. विवाह के नियम एक समान हो सकते हैं सभी समुदायों के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है। विवाह की न्यूनतम आयु और अन्य शर्तें समान हो सकती हैं। एक से अधिक विवाह (जहां वर्तमान कानून इसकी अनुमति देते हैं) पर एक समान नियम बन सकते हैं। 2. तलाक की प्रक्रिया में बदलाव अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग तलाक कानूनों की बजाय एक समान प्रक्रिया लागू हो सकती है। तलाक, गुजारा भत्ता और बच्चों की अभिरक्षा के मामलों में समान प्रावधान बनाए जा सकते हैं। 3. संपत्ति और उत्तराधिकार बेटा-बेटी, पति-पत्नी और अन्य उत्तराधिकारियों के अधिकारों को समान बनाने की दिशा में प्रावधान हो सकते हैं। संपत्ति के बंटवारे के नियम धर्म के बजाय एक समान कानून के तहत तय हो सकते हैं। 4. गोद लेने के नियम सभी समुदायों के लिए गोद लेने के समान नियम लागू किए जा सकते हैं। वर्तमान में जिन समुदायों के लिए गोद लेने के अलग प्रावधान हैं, उनमें बदलाव संभव है। 5. भरण-पोषण पति, पत्नी, बच्चों और आश्रित माता-पिता के भरण-पोषण के लिए एक समान व्यवस्था बनाई जा सकती है। क्या नहीं बदलेगा? धार्मिक पूजा-पद्धतियां, रीति-रिवाज, त्योहार और धार्मिक मान्यताएं आमतौर पर UCC के दायरे में नहीं मानी जाती हैं। UCC का फोकस मुख्य रूप से सिविल (नागरिक) मामलों पर होता है, न कि धार्मिक आस्थाओं पर। अभी की स्थिति क्या है? फिलहाल छत्तीसगढ़ सरकार ने केवल अध्ययन और प्रारूप तैयार करने के लिए समिति गठित की है। इसका मतलब है कि अभी कोई कानून लागू नहीं हुआ है। समिति की सिफारिशें आने, मसौदा तैयार होने और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रदेश में वास्तव में क्या बदलाव होंगे। Share This Article Post navigation रायपुर : जिला प्रशासन ,अग्निशमन ,नगर निगम एवं अन्य विभागों की टीम द्वारा कोचिंग सेंटरों की अग्नि सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं का निरीक्षण , नोटिस Private Schools : निजी स्कूलों की मान्यता नियमों में बड़ा बदलाव…! जमीन और परिसर शर्तों में मिली राहत