birthright citizenship
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रायपूर,01 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “US Supreme Court seals birthright citizenship… major relief for Indians.”अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जन्मजात नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) के मुद्दे पर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके माध्यम से जन्मजात नागरिकता के अधिकार को सीमित करने का प्रयास किया गया था।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को स्वत: अमेरिकी नागरिकता प्रदान करता है।

14वें संशोधन की संवैधानिक व्यवस्था बरकरार

अमेरिकी संविधान में 9 जुलाई 1868 को लागू किए गए 14वें संशोधन के नागरिकता प्रावधान के अनुसार अमेरिका की भूमि पर जन्म लेने वाला प्रत्येक बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक होगा। इस व्यवस्था से केवल विदेशी राजनयिकों, शत्रु देशों की सेना के सदस्यों तथा विदेशी सार्वजनिक जहाजों पर जन्मे बच्चों को ही बाहर रखा गया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि संविधान निर्माताओं का उद्देश्य केवल स्थायी निवासियों या नागरिकों के बच्चों तक नागरिकता सीमित करना होता, तो इसका स्पष्ट उल्लेख संविधान में किया जाता।

न्यायालय ने माना कि अमेरिका में अस्थायी अथवा अवैध रूप से रह रहे माता-पिता के यहां जन्म लेने वाले बच्चे भी 14वें संशोधन के तहत जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं।

तीन न्यायाधीशों ने जताई असहमति

फैसले से असहमति व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति सैमुअल एलिटो ने कहा कि बहुमत ने संविधान की ऐतिहासिक व्याख्या में गंभीर भूल की है। उनके अनुसार 14वां संशोधन केवल अमेरिका के प्रति निष्ठा रखने वाले लोगों पर लागू होना चाहिए।

वहीं न्यायमूर्ति क्लेरेंस थॉमस ने कहा कि इस संशोधन की मूल भावना मुक्त दासों को समान अधिकार देना थी, लेकिन वर्तमान समय में इसका राजनीतिक उद्देश्य से व्यापक उपयोग किया जा रहा है।

भारतीय समुदाय के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला

अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 52 से 54 लाख लोग रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे पेशेवरों की है जो एच-1बी कार्य वीजा, एल-1 अंत:कंपनी स्थानांतरण वीजा तथा एफ-1 छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं।

यदि ट्रंप का आदेश लागू हो जाता तो ऐसे माता-पिता के अमेरिका में जन्मे बच्चों को नागरिकता नहीं मिलती, जो स्वयं अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी नहीं हैं। इससे हजारों भारतीय परिवार प्रभावित होते।

अब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद—

  • एच-1बी वीजा पर रह रहे भारतीयों के अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्वत: अमेरिकी नागरिकता मिलेगी।
  • अस्थायी वीजा पर रह रहे भारतीय परिवारों के बच्चों को भी जन्म से नागरिकता और आजीवन अमेरिका में रहने का अधिकार मिलेगा।
  • रोजगार आधारित स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की लंबी प्रतीक्षा सूची में शामिल भारतीय परिवारों के बच्चों की नागरिकता सुरक्षित रहेगी।
  • अवैध रूप से रह रहे भारतीय प्रवासियों के अमेरिका में जन्मे बच्चों को भी जन्मजात नागरिकता का अधिकार मिलेगा। ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे लाखों भारतीयों को राहत

वर्तमान में 10 लाख से अधिक भारतीय रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची में हैं। अमेरिका में लगभग 32 लाख पंजीकृत भारतीय प्रवासी निवास करते हैं, जो वहां का दूसरा सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। भारतीय समुदाय अमेरिका के सबसे तेजी से बढ़ते प्रवासी समूहों में भी शामिल है।

इस निर्णय से उन भारतीय परिवारों को विशेष राहत मिलेगी, जिन्हें स्वयं अमेरिकी नागरिक बनने के लिए वर्षों या दशकों तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है, लेकिन उनके अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता अब पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

भारतीय-अमेरिकी संगठन ने किया स्वागत

भारतीय-अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने वाली संस्था इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक चिनटेन पटेल ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय स्पष्ट करता है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों का अधिकार संविधान द्वारा सुरक्षित है।

उन्होंने कहा कि ट्रंप के आदेश से भारतीय और दक्षिण एशियाई अप्रवासी परिवार सबसे अधिक प्रभावित होते, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनके बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं और उनका भविष्य सुरक्षित है।