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रायपुर, 4 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “Rain begins and the impact of the ‘Mor Gaon-Mor Pani’ campaign is visible: Livelihood farm ponds and new ponds are filling up to the brim” मोर गांव मोर पानी अभियान , प्रदेश में मानसून की सक्रियता के साथ ही ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के सकारात्मक परिणाम अब गांव-गांव में स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं।

पिछले कुछ दिनों से हो रही अच्छी वर्षा के कारण अभियान के तहत निर्मित आजीविका डबरियां, नवा तरिया तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से भर रही हैं।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ कृषि और आजीविका गतिविधियों को भी नई मजबूती मिल रही है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप निर्मित 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं।

वहीं ‘नवा तरिया–आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत विकसित 700 से अधिक सामुदायिक तालाब भी पानी से लबालब भरने लगे हैं।

इन जल संरचनाओं से मत्स्य पालन, सिंचाई, बागवानी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे।

     शशराज्य सरकार जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 जुलाई से लागू वीबीजी रामजी योजना के अंतर्गत भी ऐसे कार्यों को और गति दे रही है।

योजना में कुल 318 कार्य अनुमोदित किए गए हैं, जिनमें से 108 कार्य सीधे जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से संबंधित हैं।

इन कार्यों से वर्षा जल के अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

एक लाख जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संरचनाओं का निर्माण

   मोर गांव–मोर पानी’ अभियान प्रारंभ होने के पश्चात प्रदेश में एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। 

इन कार्यों पर महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लगभग 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है।

       राज्य सरकार का उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण समृद्धि का स्थायी आधार बनाना है।