Catch the Rain
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​रायपुर, 11 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “Catch the Rain” gives new momentum to Balod district: Construction of 2.84 lakh water conservation ponds through public participation. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात रेडियो कार्यक्रम के 135 वें संस्करण के दौरान #कैच द रेन अभियान की गति को बनाए रखने का आह्वान किया था। छत्तीसगढ़ का बलोद जिला जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) 2.0 के तहत समुदाय-संचालित जल संरक्षण का एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर उभरा है।

बलोद जिला ने वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के लिए कई तरह की परियोजनाएं लागू की हैं, जिनके ठोस परिणाम वर्तमान मॉनसून के दौरान दिखाई दे रहे हैं।

बलोद जिले ने जून 2025 से मई 2026 के बीच 2,84,917 जल संरक्षण और पुनर्भरण संरचनाएं स्थापित की हैं, जिससे वर्षा जल को एकत्रित और संरक्षित करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

गांवों में प्रत्यक्ष प्रभाव

बलोद जिले में कई नवोन्मेषी उपायों ने शुष्क भूभागों को उत्पादक जल संसाधनों में बदल दिया है:

ग्राम पंचायत मुंडेरा में बोरवेल के पास बने रिचार्ज गड्ढे भूजल पुनर्भरण के लिए वर्षा जल को प्रभावी ढंग से प्रवाहित कर रहे हैं।

कोंगनी ग्राम पंचायत में निर्मित पुनर्भरण गड्ढे अपवाह को अवशोषित कर रहे हैं और जलभंडार के पुनर्भरण को बढ़ा रहे हैं।

ओदरसाकरी और खुटेरी ग्राम पंचायतों में बने चेक डैम अब मानसून के पानी की पर्याप्त मात्रा को संग्रहित कर रहे हैं।

मुंडेरा में बंद पड़े बोरवेलों में रिचार्ज शाफ्ट ने अप्रयुक्त बुनियादी ढांचे को कार्यात्मक रिचार्ज सिस्टम में पुनर्जीवित कर दिया है।

भाथागांव (आर) में विकसित की गई कंटूर ट्रेंचें अपवाह को कम कर रही हैं, मिट्टी की नमी का संरक्षण कर रही हैं और वृक्षारोपण तथा जलसंभर विकास में सहयोग प्रदान कर रही हैं।

जिले भर में बने सामुदायिक बांध टिकाऊ जल भंडारण का निर्माण कर रहे हैं जिससे कृषि और आसपास के गांवों को लाभ मिल रहा है।

इन स्थलों से प्राप्त आश्चर्यजनक पहले और बाद की तस्वीरें विकेन्द्रीकृत जल संरक्षण की प्रभावशीलता को दर्शाती हैं.

तवेरा नाला पुनर्जीवन : मॉडल

बलोद जिले की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक गंदरदेही ब्लॉक के भाथागांव (आर) में स्थित तावेरा नाले का पुनरुद्धार है। #कैच द रेन अभियान और जल संचय जन भागीदारी के तहत सामूहिक प्रयासों के माध्यम से, बलोद ने 14.3 किमी लंबे नाले को पुनर्जीवित किया है। इसके लिए 6,250 से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिनमें चेक डैम, खाइयां, मैजिक पिट, सोक पिट, इंजेक्शन वेल, वर्षा जल संचयन प्रणाली और ग्रेवाटर ट्रीटमेंट सुविधाएं शामिल हैं।

इन उपायों से 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल का संरक्षण संभव होने की उम्मीद है, साथ ही भूजल स्तर में अनुमानित 5-10 फीट का सुधार होगा।

जल संरक्षण में सिद्ध अग्रणी

बलोद जिले ने जल संरक्षण में निरंतर अगुवाई की है। जेएसजेबी 1.0 के तहत, जिले ने 1.06 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया, जिसके लिए उसने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा और पूर्वी क्षेत्र में #कैच द रेन अभियान के अंतर्गत पहला स्थान प्राप्त किया, जिसके लिए उसे राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।

गति को बनाए रखना

ये कार्य प्रधानमंत्री की हर बूंद बचाने और #कैच द रेन अभियान की गति को बनाए रखने की अपील के अनुरूप है।