रायपुर,14 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “FCI rejects claim of ₹1,160 crore rice scam, investigation limited to just ₹5.63 lakh” भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने मध्यप्रदेश में 1,160 करोड़ रुपये के सरकारी चावल घोटाले से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह निराधार बताया है। FCI चावल घोटाला दावा खारिज करते हुए निगम ने स्पष्ट किया कि वर्तमान जांच केवल 490 बोरी (242.50 क्विंटल) चावल की कथित हेराफेरी से संबंधित है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 5.63 लाख रुपये है।
1,160 करोड़ रुपये का आंकड़ा क्या है?
एफसीआई ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि 1,160 करोड़ रुपये का आंकड़ा किसी घोटाले का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग योजना के तहत मध्यप्रदेश की डिस्टिलरियों को वैध भुगतान प्राप्त होने के बाद जारी किए गए चावल के कुल मूल्य का है। इसलिए इसे कथित हेराफेरी की राशि बताना तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
जांच सिर्फ 490 बोरी चावल तक सीमित
एफसीआई के अनुसार, जांच केवल 490 बोरी चावल की कथित अवैध डायवर्जन (हेराफेरी) तक सीमित है। यह मात्रा करीब 242.50 क्विंटल है और इसकी कीमत लगभग 5.63 लाख रुपये आंकी गई है। निगम ने कहा कि मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एथेनॉल योजना के तहत हुआ था चावल का आवंटन
एफसीआई ने बताया कि एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2024-25 के दौरान मध्यप्रदेश की डिस्टिलरियों को लगभग 2.98 लाख मीट्रिक टन चावल 22.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया गया। वहीं ESY 2025-26 में 30 जून 2026 तक लगभग 2.41 लाख मीट्रिक टन चावल 23.20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से जारी किया गया। कुल 5.39 लाख मीट्रिक टन चावल की वैध आपूर्ति के आधार पर ही 1,160 करोड़ रुपये का आंकड़ा सामने आया, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्टों में गलत तरीके से घोटाले से जोड़ दिया गया।
