रायपुर, 19 जुलाई 2026/ Water for Farmers: Four decades of waiting are over! Water from Sukma’s Koyabekur Canal reaches the fields.
Water For Farmers : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के कोयाबेकुर और गोलाबेकुर क्षेत्र के किसानों का करीब चार दशक पुराना इंतजार अब खत्म हो गया है। वर्षों से बंद पड़ी कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना की नहर का पुनर्जीवन कर खेतों तक पानी पहुंचाया गया है।
इससे क्षेत्र के 100 से अधिक किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और 160 हेक्टेयर भूमि में खेती को बढ़ावा मिलेगा।
1983 में बनी नहर, चार दशक बाद फिर पहुंचा पानी
कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना की शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी। कुछ समय तक नहर से पानी मिला, लेकिन रखरखाव के अभाव और नक्सल प्रभावित परिस्थितियों के कारण नहर धीरे-धीरे जर्जर होकर बंद हो गई।
इसके बाद किसानों को सिंचाई के लिए पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहना पड़ता था। कई किसान महंगे बोरवेल के माध्यम से सिंचाई करने को मजबूर थे।
किसानों की इस लंबे समय से चली आ रही समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने पहल की। वर्ष 2023 में परियोजना के लिए 187.22 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इसके बाद वर्ष 2024 से नहर के व्यापक जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हुआ।
2.74 किलोमीटर लंबी नहर में सीसी लाइनिंग सहित आवश्यक आधुनिक संरचनाओं का निर्माण किया गया।
जून 2026 में नहर के अंतिम छोर तक पहुंचा पानी
नहर के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा होने के बाद जून 2026 में नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाया गया। वर्षों से सूखे पड़े खेतों में अब फिर से हरियाली की उम्मीद जगी है।
इससे किसानों को खरीफ के साथ-साथ गर्मी के मौसम में भी खेती करने का अवसर मिलेगा। अब किसान केवल धान की खेती तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नकदी और अन्य लाभकारी फसलों की खेती भी कर सकेंगे।
किसानों के चेहरे पर लौटी खुशी
किसान श्री संपत यादव ने कहा कि जब वर्ष 1983 में नहर बनी थी, तब वे बहुत छोटे थे। कुछ समय तक नहर में पानी आया, लेकिन इसके बाद दशकों तक नहर सूखी और जर्जर पड़ी रही। अब नहर के पुनर्जीवन से गर्मी के मौसम में भी खेती करना संभव होगा।
किसान श्री मुकेश सोढ़ी ने कहा कि अब खेतों तक पानी पहुंचने से सिंचाई आसान होगी.
