रायपुर, 22 जुलाई 2026 / ETrendingIndia / Study: Calm and respectful dialogue helps keep families together long-term, harsh behavior with adolescents impacts generations / नई रिसर्च में सामने आया है कि किशोरावस्था में माता-पिता का कठोर व्यवहार केवल उस समय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर आने वाली पीढ़ियों तक दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गुस्से की बजाय शांत और सम्मानजनक संवाद परिवारों को लंबे समय तक जोड़े रखने में मदद करता है।
37 वर्षों तक चला शोध
अमेरिका की आयोवा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 1989 से 2026 तक चले ‘फैमिली ट्रांजिशंस प्रोजेक्ट’ के तहत 550 परिवारों का अध्ययन किया।
इस दौरान परिवारों के व्यवहार, बातचीत और रिश्तों का गहराई से विश्लेषण किया गया।
तीन पीढ़ियों पर दिखा प्रभाव
अध्ययन में पाया गया कि जिन माता-पिता का व्यवहार 16 वर्ष के बच्चों के प्रति अधिक कठोर था, वे बच्चे बड़े होने पर अपने माता-पिता से भावनात्मक रूप से दूर हो गए।
आगे चलकर जब वे स्वयं माता-पिता बने, तब उनके बच्चों और दादा-दादी के बीच भी मजबूत संबंध नहीं बन पाए।
नरम संवाद से मजबूत होंगे रिश्ते
शोधकर्ताओं का कहना है कि किशोरावस्था में धैर्य, समझदारी और सम्मानजनक बातचीत अपनाने से परिवारों में विश्वास बढ़ता है।
विवाद प्रबंधन, भावनाओं पर नियंत्रण और बेहतर संवाद की आदतें न केवल वर्तमान तनाव कम करती हैं, बल्कि दादा-दादी, माता-पिता और बच्चों के बीच पीढ़ियों तक आत्मीयता बनाए रखने में भी मददगार साबित होती हैं।
