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रायपुर, 22 जुलाई 2026 / ETrendingIndia / Dangerous sewer and septic tank cleaning: 332 sanitation workers died in 5 years / भारत सरकार ने मैनुअल स्कैवेंजर्स के तौर पर रोजगार और उनके पुनर्वास निषेध अधिनियम, 2013 को सख्ती से लागू करके, प्रभावित लोगों के पुनर्वास और मशीनीकृत सफाई प्रणालियों को बढ़ावा देकर हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह खत्म करने के अपने संकल्प को फिर से दोहराया है।

यह अधिनियम, जो 6 दिसंबर 2013 को लागू हुआ था, किसी भी व्यक्ति को मैनुअल स्कैवेंजर के तौर पर काम पर रखने या नियुक्त करने पर रोक लगाता है और नियमों के उल्लंघन के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करता है।

यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने लोकसभा में लिखित सवाल के जवाब में दी।

सदन को दी गई जानकारी में बताया गया है कि एक्ट 2013 की धारा 8 के तहत, अगर कोई व्यक्ति या एजेंसी किसी हाथ से मैला ढोने वाले को काम पर रखती है या उससे काम करवाती है, तो उसे दो साल तक की जेल, ₹1 लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह इस अमानवीय प्रथा के प्रति सरकार के ज़ीरो-टॉलरेंस के रुख को मज़बूत करता है।

लिखित जवाब में जानकारी दी गई है कि 1 जनवरी 2021 से 30 जून 2026 की अवधि के दौरान 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई करते समय 332 सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई।

लिखित उत्तर के अनुसार, कानून के प्रावधानों के तहत, खतरनाक मैनुअल सफाई के लिए ज़िम्मेदार एजेंसियों और अधिकारियों के खिलाफ संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा पिछले पांच वर्षों में 193 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

सदन को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मशीनीकृत सीवर सफ़ाई के कार्यान्वयन के संबंध में कोई अलग से मूल्यांकन नहीं किया गया है।

सदन को यह भी बताया गया कि सभी ज़िलों में किए गए हालिया सर्वेक्षणों में हाथ से मैला ढोने की प्रथा का कोई मामला सामने नहीं आया है ।