Reliance Capital
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रायपुर, 03 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, उसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ 1,816.22 करोड़ रुपए के कथित EPFO निवेश घोटाले में एफआईआर दर्ज की है।

एजेंसी का आरोप है कि आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराधों के जरिए 1,007.55 करोड़ रुपए का गलत नुकसान पहुंचाया गया, जबकि इस पर 808.67 करोड़ रुपए की ब्याज देनदारी भी जुड़ गई।

सीबीआई के अनुसार, यह एफआईआर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 2013 और 2014 के दौरान रिलायंस कैपिटल लिमिटेड ने सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) जारी किए थे, जिनमें ईपीएफओ ने चार पोर्टफोलियो मैनेजरों, जिनमें रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड भी शामिल थी, के माध्यम से 2,500 करोड़ रुपए का निवेश किया था।

इन एनसीडी की परिपक्वता (मेच्योरिटी) 2023 और 2024 में होनी थी। हालांकि, शिकायत के अनुसार आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी लेनदेन किए और निवेश की गई राशि का दुरुपयोग तथा दूसरी जगह डायवर्ट किया।

इसके कारण रिलायंस कैपिटल एनसीडी का भुगतान (रिडेम्शन) नहीं कर सकी, जिससे ईपीएफओ को कुल 1,816.22 करोड़ रुपए का कथित नुकसान हुआ।

सीबीआई ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की पहचान की जाएगी, जिनमें सरकारी अधिकारी और निजी व्यक्ति दोनों शामिल हैं।

साथ ही कथित आपराधिक साजिश की जांच की जाएगी और निवेश की गई राशि आखिर कहां खर्च की गई, इसका भी पता लगाया जाएगा। जांच एजेंसी ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी वह रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की शिकायतों के आधार पर सात एफआईआर दर्ज कर चुकी है।

सीबीआई अब तक रिलायंस एडीए समूह से जुड़े मामलों में चार आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है और सात आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। एजेंसी ने कहा कि ये सभी मामले अभी जांच के दायरे में हैं और इनकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा है।

सीबीआई ने कहा कि वह इन मामलों की तेज, निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए प्रतिबद्ध है।