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रायपुर, 06 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / अल नीनो के असर पर सरकार की निगरानी

केंद्र सरकार ने अल नीनो जैसी वैश्विक जलवायु परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए रखने की बात कही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) मानसून, वर्षा और तापमान से जुड़े पूर्वानुमान नियमित रूप से जारी कर रहा है।

पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौसम संबंधी सूचनाएं राज्यों और संबंधित एजेंसियों को पहले से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे संभावित जोखिमों से निपटने की तैयारी में मदद मिलती है।

अल नीनो से कमजोर हो सकता है मानसून

अल नीनो मानसून पूर्वानुमान के संदर्भ में IMD भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून पर इसके संभावित प्रभाव का नियमित आकलन करता है। सामान्य तौर पर अल नीनो की स्थिति बनने पर भारतीय मानसून कमजोर हो सकता है।

सरकार के अनुसार, इसका प्रभाव अल नीनो की तीव्रता पर निर्भर करता है। वर्ष 1950 के बाद अब तक 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी है। इनमें सात मौकों पर मानसूनी वर्षा सामान्य से कम रही।

विशेष रूप से सितंबर की बारिश पर अल नीनो का प्रभाव अधिक स्पष्ट देखा गया है। इसलिए मानसून के दौरान मौसम संबंधी निगरानी को महत्वपूर्ण माना जाता है।

2026 में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

IMD ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए भी पहले से पूर्वानुमान जारी किया था। 13 अप्रैल 2026 को जारी पहले दीर्घकालिक पूर्वानुमान में मौसमी बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) की 92 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।

इसके बाद इस अनुमान को संशोधित कर 90 प्रतिशत किया गया। इन पूर्वानुमानों में अल नीनो की संभावित स्थिति का भी उल्लेख किया गया था।

इससे केंद्र और राज्य सरकारों सहित संबंधित विभागों को समय रहते जरूरी तैयारियां करने में मदद मिली।

जिला और ब्लॉक स्तर तक मिल रही मौसम जानकारी

अल नीनो मानसून पूर्वानुमान के साथ IMD मानसून के दौरान रोजाना बारिश की स्थिति की जानकारी भी जारी करता है। इसके अलावा, हर महीने अल नीनो की परिस्थितियों की निगरानी की जाती है।

विभाग जिला और ब्लॉक स्तर तक वर्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराता है। साथ ही, प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की बैठकों में मौसम संबंधी अपडेट साझा किए जाते हैं।

कृषि मंत्रालय की क्रॉप वेदर वॉच व्यवस्था के तहत भी साप्ताहिक मौसम जानकारी दी जाती है। इसमें पिछले सप्ताह की बारिश और अगले दो सप्ताह के वर्षा पूर्वानुमान शामिल होते हैं।

कृषि और जल संसाधनों पर भी नजर

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) भी 2026 में कृषि और बांध प्रबंधन से जुड़े विभागों के साथ काम कर रहा है।

इसका उद्देश्य मौसम आधारित और अल्प एवं मध्यम अवधि के पूर्वानुमानों का बेहतर इस्तेमाल करना है। साथ ही, ENSO यानी अल नीनो-दक्षिणी दोलन के कृषि और जल संसाधनों पर संभावित प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।

समय से जारी हो रही हैं चेतावनियां

सरकार ने स्पष्ट किया कि 2026 में अल नीनो के प्रभाव से निपटने के लिए राज्यों को कोई अलग जिला-वार जोखिम मूल्यांकन अध्ययन या विशेष दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

हालांकि, IMD लगातार मौसमी आउटलुक और मौसम संबंधी पूर्वानुमान जारी कर रहा है। इसके अलावा, बारिश, लू और अन्य चरम मौसमीय घटनाओं को लेकर अग्रिम चेतावनियां भी दी जा रही हैं।

कुल मिलाकर, अल नीनो मानसून पूर्वानुमान के जरिए सरकार और मौसम एजेंसियां संभावित प्रभावों पर नजर बनाए हुए हैं। समय पर मौसम जानकारी मिलने से राज्यों और संबंधित विभागों को जोखिम कम करने की तैयारी में मदद मिल रही है।


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