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लेख – विष्णु प्रसाद वर्मा, संत कुमार कच्छप सहायक संचालक, जनसंपर्क

​रायपुर, 07 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / जी हाँ, पक्का मकान बनाना और अपना सपना पूरा करना वाकई एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसके लिए भारी बजट, सही सामग्री की पहचान, कुशल मजदूरों का इंतजाम और सरकारी नियमों या लोन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जो हर किसी के लिए आसान नहीं होता। सपनों के घर का सपना देखना और उसे हकीकत में बदलने का सपना धीरे-धीरे प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से साकार हो रहा है.

जब इसी सपने को साकार करने के लिए शासन का मजबूत संबल और आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो संघर्षों से भरे जीवन में एक सुखद बदलाव आ जाता है।

जीवन में खुशहाली की नई बयार लेकर आई

   ​छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और पीएम जनमन (प्रधानमंत्री आदिवासी न्याय महाअभियान) जैसी योजनाएँ ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली की नई बयार लेकर आई हैं। 

यहाँ के सुदूर ग्राम पंचायतों में अब मिट्टी और फूस की कच्ची झोपड़ियों की जगह पक्के आशियाने आकार ले रहे हैं। जिन परिवारों के घर बनकर तैयार हो चुके हैं, वे विधिवत गृह-प्रवेश और पूजा-अनुष्ठान के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं, वहीं जिन्हें नए आवास की स्वीकृति मिली है, वे भूमि-पूजन कर इस बदलाव का जश्न मना रहे हैं।

दो वर्षों में 6 हज़ार परिवारों को मिली पक्के घर की सौगात

​  नारायणपुर जिले में योजना के सफल क्रियान्वयन से ज़िले में 6,000 से अधिक पात्र परिवारों के पक्के घर का सपना साकार हुआ है, जिन्हें आधिकारिक तौर पर स्वीकृति दी जा चुकी है।

निर्माण कार्य को गति देने के लिए 4,000 हितग्राहियों को पहली किस्त की राशि भी जारी की जा चुकी है, जिससे उन्होंने अपने नए आशियाने की नींव रख दी है।

ज़िले में अब तक 1,650 परिवारों के घर पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं, जहाँ वे सुकून भरा जीवन बिता रहे हैं, जबकि शेष मकानों का निर्माण कार्य भी अंतिम चरणों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

​सुदूर अबूझमाड़ के वनांचलों तक पहुँचा विकास का उजाला

  ​नारायणपुर का एक बड़ा हिस्सा दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ अत्यंत पिछड़ी जनजाति ‘अबूझमाड़िया’ समुदाय के लोग निवास करते हैं। विकास की मुख्यधारा से इन परिवारों को जोड़ने के लिए पीएम जनमन योजना के तहत विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

योजना के तहत ज़िले के दूरस्थ इलाकों में अब तक 4,892 विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष पात्र परिवारों का सर्वे निरंतर जारी है। इस व्यापक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 2,390 परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।

भौगोलिक चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद 315 पक्के मकान बनकर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि विकास की यह बयार अब अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही है।

विशेष परियोजनाओं से मिला पुनर्वास और नया भरोसा

  ​नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और पुनर्वास को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा 'स्पेशल प्रोजेक्ट' के तहत भी विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।

आत्मसमर्पित व्यक्तियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन देने के लिए सर्वे का काम प्रगति पर है। इस विशेष पहल के तहत 649 हितग्राहियों को आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 410 लोगों को प्रथम किस्त जारी की जा चुकी है और 13 परिवार अपने नए पक्के मकानों में शिफ्ट भी हो चुके हैं।

योजना नारायणपुर के वनांचलों में उम्मीद और खुशहाली की एक नई इबारत लिख रहा है।


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