Defence Agreement
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रायपुर, 08 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में हुए इस समझौते के बाद तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की संभावना है। समझौते के अनुसार, तीनों देशों में से किसी एक पर होने वाला सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

इस समझौते पर तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप अर्दोआन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।

बताया जा रहा है कि इस समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी, लेकिन पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के कारण प्रक्रिया को तेज कर दिया गया।

पिछले वर्ष हुए रक्षा समझौते का विस्तार

रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले वर्ष हुए रक्षा समझौते का विस्तार है। इसके तहत तीनों देश सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा तकनीक, हथियार निर्माण, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे।

समझौते में सऊदी अरब अपनी आर्थिक क्षमता, रणनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय भूमिका का योगदान देगा। तुर्की आधुनिक सैन्य तकनीक और रक्षा क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता साझा करेगा, जबकि पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता और युद्ध अनुभव के आधार पर सहयोग करेगा।

पाकिस्तान मुस्लिम देशों में एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। उसकी सेना लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों में सक्रिय रही है।

तुर्की उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का सदस्य है और उसके पास मजबूत रक्षा उद्योग तथा आधुनिक सैन्य तकनीक मौजूद है। हाल के वर्षों में तुर्की ने गाजा संघर्ष सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाई है।

वहीं, सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातक देशों में शामिल है और खाड़ी क्षेत्र में उसका महत्वपूर्ण राजनीतिक तथा आर्थिक प्रभाव है। वह अमेरिका का प्रमुख सहयोगी भी माना जाता है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बावजूद यह समझौता केवल तत्काल परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका महत्व लंबे समय के रणनीतिक संबंधों से जुड़ा है।

मुस्लिम दुनिया के तीन प्रभावशाली देशों के बीच सुरक्षा सहयोग

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सेना प्रमुख असीम मुनीर भी सऊदी अरब दौरे पर मौजूद थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता मुस्लिम दुनिया के तीन प्रभावशाली देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।

इससे क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर नजर रखी जा रही है।
भारत ने इस रक्षा समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि तीनों देशों के बीच हुए समझौते से जुड़े सभी पहलुओं की निगरानी की जा रही है और समय-समय पर जानकारी साझा की जाएगी।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात को लेकर चिंता बनी हुई है। आने वाले समय में इसके क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभावों पर सभी देशों की नजर रहेगी।