रायपुर, 08 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी ने पाया कि मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को 2023 की जातीय हिंसा से जोडऩे वाले कथित ऑडियो क्लिप के साथ छेड़छाड़ की गई थी और उन्हें एडिट किया गया था.
यह जानकारी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई.जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच उन रिकॉर्डिंग की कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग वाली पीआईएल पर सुनवाई कर रही थी.
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बेंच के सामने केंद्र और राज्य सरकारों का पक्ष रखा.यह रिपोर्ट दो घंटे लंबे ऑडियो क्लिप के बारे में थी.
इसे याचिकाकर्ता ने इस साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनएफएसयू को सौंपा था. इससे पहले संस्थान ने 48 मिनट के ऑडियो क्लिप की पुष्टि करने में कठिनाई जताई थी.सुनवाई के दौरान, भाटी ने छह पेज की रिपोर्ट और उसके नतीजों का जिक्र किया.
उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि रिकॉर्डिंग में कई बदलाव किए गए थे और उन्होंने रिपोर्ट बेंच को सौंप दी. याचिकाकर्ता कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने ऑडियो क्लिप पर एनएफएसयू के नतीजों पर सवाल उठाए.
भूषण ने तर्क दिया कि ट्रुथ लैब को रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाजों के बीच 93 प्रतिशत मैच मिला था और यह रिपोर्ट देश की एक प्रीमियम फोरेंसिक लैब ने दी थी, जिसके संस्थापक जस्टिस वेंकटचलैया थे.
रिपोर्ट आवाजों में 93 प्रतिशत मैच है
भूषण ने कहा, उस ट्रुथ लैब ने साफ तौर पर रिपोर्ट दी थी कि आवाजों में 93 प्रतिशत मैच है.इन्हीं क्लिप के आधार पर याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि सिंह ने उग्रवाद को बढ़ावा दिया और मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान हथियार लूटने वालों को बचाया.
भूषण ने संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए पुरजोर तर्क दिए और कहा, मैं पहले हलफनामा दाखिल करने से बच रहा था, लेकिन अब मैं इस संस्था के खिलाफ हलफनामा दाखिल करूंगा.
भूषण के लहजे पर आपत्ति जताते हुए भाटी ने कहा कि पीठ को उन्हें नरम लहजे में तर्क देने की सलाह देनी चाहिए और उन्हें धमकाने का प्रयास नहीं करना चाहिए.भाटी ने दलील दी कि अदालत को याचिका खारिज कर देनी चाहिए और उन पर खर्च भी लगाना चाहिए, क्योंकि यह 2024 से लंबित है.
उन्होंने कहा कि व्हिसलब्लोअर की रिकॉर्डिंग की पहली पीढ़ी की प्रति में भी बदलाव किए गए थे, जिसके कारण एनएसएफयू विश्वसनीय फोरेंसिक सत्यापन करने में असमर्थ रहा.उन्होंने कहा, मैंने सीएफएसएल के डॉक्टरों से बात की और उनसे मुझे पत्र भेजने को कहा. यहां तक कि इस (दो घंटे लंबी ऑडियो क्लिप) में भी 41 बदलाव हैं.
भाटी ने कहा, मुझे बताया गया है कि इसमें भी वही बदलाव हैं (पहले वाले की तरह)ज् इसमें स्पष्ट रूप से छेड़छाड़ की गई है. भाटी ने पीठ के समक्ष कहा और बताया कि पूरी ऑडियो क्लिप में 23 अंतराल हैं.
पीठ ने कहा कि वह हालिया रिपोर्ट के आधार पर दोनों पक्षों की बात सुनेगी और उन्हें रिपोर्ट के विषयवस्तु पर जवाब देने का अवसर देगी. पीठ ने भूषण को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया. पिछले साल अगस्त में, सर्वोच्च न्यायालय ने एनएफएसयू को 48 मिनट की ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता सत्यापित करने और यह निर्धारित करने के लिए कहा था कि रिकॉर्डिंग में आवाज बीरेन सिंह की है या नहीं.
