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रायपुर, 08 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित जन्म पर्यटन (बच्चे को जन्म दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका की यात्रा) और जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को लेकर सख्ती बढ़ाते हुए आव्रजन से जुड़े दो नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं।

इन आदेशों का उद्देश्य अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वत: मिलने वाली नागरिकता के दायरे को सीमित करना तथा केवल बच्चे को जन्म देने के उद्देश्य से अमेरिका आने वाले विदेशी नागरिकों पर रोक लगाना है।

जन्मजात नागरिकता की व्यवस्था का दुरुपयोग

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जन्मजात नागरिकता की व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसे रोकने के लिए प्रशासन आवश्यक कदम उठा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने जन्मजात नागरिकता की व्यवस्था को लेकर संविधान की भावना का सही पालन नहीं किया है।

पहले कार्यकारी आदेश के तहत उन बच्चों की श्रेणियों का विस्तार किया गया है, जिन्हें अब जन्म के आधार पर स्वत: अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी।

व्हाइट हाउस के उप प्रमुख (डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ) स्टीफन मिलर के अनुसार, नए प्रावधानों में विदेशी आतंकवादी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों, विदेशी सरकारों की ओर से कार्य करने वाले लोगों तथा अमेरिका द्वारा विदेशी शत्रु माने जाने वाले व्यक्तियों के बच्चों को भी शामिल किया गया है।

वीजा नियमों को और कड़ा करने का प्रावधान

दूसरे कार्यकारी आदेश में जन्म पर्यटन पर रोक लगाने के लिए वीजा नियमों को और कड़ा करने का प्रावधान किया गया है। जन्म पर्यटन से आशय उस स्थिति से है, जब कोई विदेशी नागरिक केवल बच्चे को अमेरिका में जन्म दिलाकर उसे अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से यात्रा करता है।

वीजा धोखाधड़ी

नए आदेश के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पर्यटक वीजा लेकर अमेरिका जाता है, लेकिन उसका वास्तविक उद्देश्य बच्चे को जन्म देना है, तो इसे वीजा धोखाधड़ी माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के अमेरिका में प्रवेश पर आजीवन प्रतिबंध तक लगाया जा सकता है।

गर्भवती महिलाओं के पर्यटक वीजा आवेदनों की अधिक गहन जांच

इसके अलावा, जन्म पर्यटन संचालित करने वाले संगठनों और एजेंटों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। गर्भवती महिलाओं के पर्यटक वीजा आवेदनों की अधिक गहन जांच की जाएगी और आवश्यकता पडऩे पर अतिरिक्त दस्तावेज तथा पूछताछ भी की जा सकती है।
ट्रंप प्रशासन के इन आदेशों को लेकर कानूनी विवाद भी शुरू हो गया है। अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संघ (एसीएलयू) ने इसे संविधान के विरुद्ध बताते हुए कहा कि जन्मजात नागरिकता अमेरिकी संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है और कार्यकारी आदेश के माध्यम से इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
आव्रजन मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता साइरस मेहता ने भी इन आदेशों को स्पष्ट रूप से असंवैधानिक बताया है। उनका कहना है कि इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही अपना निर्णय दे चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन आदेशों का तत्काल प्रभाव उन भारतीयों पर नहीं पड़ेगा, जो एच-1बी, एल-1 या अन्य वैध रोजगार अथवा दीर्घकालिक वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं। ऐसे लोगों को जन्म पर्यटन की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।
हालांकि, पर्यटक वीजा पर अमेरिका जाने वाले आवेदकों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं, की जांच पहले की तुलना में अधिक कड़ी हो सकती है। वीजा स्वीकृति में अधिक समय लग सकता है और यात्रा के उद्देश्य को लेकर अतिरिक्त पूछताछ भी की जा सकती है।
हालांकि ट्रंप प्रशासन जन्म पर्यटन को गंभीर समस्या बता रहा है, लेकिन उपलब्ध सरकारी और स्वतंत्र आंकड़े इसकी सीमित व्यापकता की ओर संकेत करते हैं।
माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार अमेरिका में प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख बच्चों का जन्म होता है, जिनमें से केवल लगभग 26 हजार मामलों को जन्म पर्यटन से संबंधित माना जाता है। वहीं वर्ष 2024 में विदेशी माताओं ने अमेरिका में लगभग 9,600 बच्चों को जन्म दिया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए आदेशों का सबसे अधिक प्रभाव पर्यटक वीजा आवेदनों और जन्म पर्यटन से जुड़े मामलों पर पड़ेगा, जबकि वैध रोजगार और दीर्घकालिक वीजा धारकों के लिए फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।


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