Share This Article रायपुर, 13 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / गुजरात इस समय चांदीपुरा वायरस की चपेट में है। बीते करीब 5 हफ्तों में यहां इस वायरस की चपेट में आकर 25 लोगों ने दम तोड़ दिया है। वहीं, 35 से ज्यादा बच्चे संक्रमित हो गए हैं। हालांकि, अभी तक विशेषज्ञों को ये पता नहीं चल पाया है कि वायरस आखिर फैल कैसे रहा है। शुरुआत में शक था कि सैंडफ्लाइज (बालू या रेत मक्खी) से ये फैल रहा है, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमण फैलने के बाद हजारों सैंडफ्लाइज की बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की गई। बाद में मच्छरों और टिक्स की भी स्क्रीनिंग हुई, लेकिन सभी की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई। अभी तक विशेषज्ञों को ये पता नहीं है कि आखिर वायरस पनप कहां रहा है। 2024 में फैले संक्रमण के दौरान भी विशेषज्ञों ने ऐसी ही स्क्रीनिंग की थी, लेकिन तब भी वायरस के स्त्रोत के बारे में कोई सुराग नहीं मिला था।पशुपालन विभाग के एक अधिकारी ने कहा, इंसानों में बीमारी के मामले एक साथ कई नहीं मिल रहे हैं, बल्कि हर इलाके से इक्का-दुक्का मामले सामने आ रहे हैं। हमें एक ही इलाके से कई मामले नहीं मिल रहे हैं। इसलिए हमारा मानना है कि बीमारी फैलाने वाले जीवों की संख्या भी कम होगी। आमतौर पर किसी जीव से फैलने वाली बीमारी में जितने ज्यादा मरीज होते हैं, जीव के मिलने की संभावना भी उतनी ही ज्यादा होती है।बीमारियों पर शोध करने वाले एक राष्ट्रीय संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, हमने सैंडफ्लाई के कई सैंपल इक_ा किए हैं और अभी आरटी-पीसीआर के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वे चांदीपुरा वायरस से संक्रमित थीं। हमें अभी तक कोई पॉजिटिव सैंपल नहीं मिला है। हम मच्छरों की भी जांच कर रहे हैं, लेकिन अभी तक वहां भी कोई पॉजिटिव नतीजा नहीं मिला है। सरकार ने कहा कि अब जानवरों की निगरानी का दायरा भी बढ़ाया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वायरस पालतू जानवरों में फैल रहा है। बयान में कहा, जांच के लिए गाय, भैंस और बकरियों के खून और दूध के सैंपल लिए गए हैं। अब तक जानवरों के खून के लगभग 70 सैंपल लिए जा चुके हैं और चांदीपुरा वायरस व अन्य संबंधित संक्रमणों के लिए उनकी जांच की जा रही है। चांदीपुरा वायरस का नाम महाराष्ट्र के चांडीपुरा गांव के नाम पर रखा गया है, जहां ये पहली बार 1965 में मिला था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, चांदीपुरा वायरस रैब्डोविरिडे परिवार का वायरस है। इसका संबंध बच्चों में होने वाले एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम से है। बारिश के मौसम में इसके मामले बढ़ जाते हैं। शुरुआत में बुखार, सिरदर्द, थकान जैसे सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं, जो गंभीर स्थिति में मरीज को कोमा में पहुंचा देते हैं। Share This Article Post navigation Mysterious Well : कुएं में अचानक उठने लगीं समुद्र जैसी लहरें…! गांव में मचा हड़कंप…अधिकारी भी पहुंचे देखने…यहां देखें VIDEO Sunday on Cycle 2026 : नशे के खिलाफ सूरत में 6 सितंबर को साइकिल रैली, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे नेतृत्व