Share This Article रायपुर, 13 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद अहमद प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कार्यक्रम में शामिल होने और आतंकियों के साथ मंच साझा करने को लेकर विवादों में घिर गए हैं। कार्यक्रम का एक वीडियो सामाजिक माध्यमों पर सामने आया है, जिसमें शेख रशीद को लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर खालिद मसूद संधू और कारी मोहम्मद याकूब शेख के साथ मंच पर देखा जा सकता है। खालिद मसूद संधू लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर होने के साथ पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग के अध्यक्ष भी हैं। वहीं, कारी मोहम्मद याकूब शेख को आतंकी संगठन की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य बताया जाता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शेख रशीद ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख और मुंबई आतंकवादी हमलों के साजिशकर्ताओं में शामिल हाफिज सईद की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, मैं हाफिज साहब का गुलाम हूं। रशीद ने दावा किया कि अमेरिका में रहते हुए उनके फोन पर हाफिज सईद का फोन नंबर दिखाई दिया था, जिसके बाद उन्हें अमेरिका से निष्कासित कर दिया गया। सभा में शेख रशीद ने भारत के खिलाफ भी आपत्तिजनक और धमकी भरे बयान दिए। उन्होंने कहा कि यदि भारत पाकिस्तान की ओर देखता है तो अल्लाह उसे नष्ट कर देगा। उन्होंने यहां तक कहा कि भारत में न पक्षी चहचहाएंगे और न मंदिरों में घंटियां बजेंगी। रशीद ने यह भी कहा कि वे हाफिज सईद के साथ हैं। शेख रशीद का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब लश्कर-ए-तैयबा को भारत समेत कई देशों में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। शेख रशीद अवामी मुस्लिम लीग के संस्थापक हैं। वह पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी नेताओं में माने जाते हैं। उनके पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से भी घनिष्ठ संबंध रहे हैं। रशीद वर्ष 2020 से 2022 तक इमरान खान सरकार में पाकिस्तान के 38वें गृह मंत्री रहे। इससे पहले वह पाकिस्तान सरकार में कई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। शेख रशीद का भारत से जुड़ा एक पुराना विवाद भी रहा है। वर्ष 2004 में जब वह पाकिस्तान के सूचना मंत्री थे, तब उन्हें तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पाकिस्तान दौरे के दौरान उनके स्वागत की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय की आपत्ति के बाद शेख रशीद को इस जिम्मेदारी से हटा दिया गया था और उनकी जगह शौकत अजीज को लगाया गया था। लश्कर-ए-तैयबा के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी और हाफिज सईद के समर्थन में दिए गए बयान ने पाकिस्तान की राजनीति और आतंकवादी संगठनों के बीच संबंधों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। Share This Article Post navigation लेह में भूकंप के तेज झटके, 5.5 रही तीव्रता, 10 किलोमीटर की गहराई पर था केंद्र डोनाल्ड ट्रंप तीसरी बार बनना चाहते हैं अमेरिका के राष्ट्रपति, एक बार फिर जाहिर की इच्छा