Ebola havoc worsensEbola havoc worsens
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रायपुर, 14 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / अफ्रीकी देश कांगो में इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। WHO प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने चेतावनी दी है कि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो 2026 का यह प्रकोप 2014-16 के इबोला संकट से भी ज्यादा घातक हो सकता है।

इस बार अब तक करीब 4,300 मामले सामने आए हैं और 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

तीन महीने में काबू पाने की कोशिश

WHO ने कहा है कि संक्रमण की रफ्तार को अगले तीन महीनों में नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि तीन महीने में बीमारी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

फरवरी से फैल रहा था वायरस

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को हुई, लेकिन वायरस का प्रसार फरवरी से ही शुरू हो गया था। शुरुआती मामलों को मलेरिया और टाइफाइड समझे जाने से संक्रमण पर समय रहते नियंत्रण नहीं हो सका।

दुर्लभ वायरस ने बढ़ाई चुनौती

2026 का प्रकोप Bundibugyo प्रजाति के इबोला वायरस से जुड़ा है। इस वायरस के अब तक केवल 2007 और 2012 में दो प्रमुख प्रकोप दर्ज हुए हैं। इसके लिए अभी कोई स्वीकृत वैक्सीन या मान्यता प्राप्त इलाज उपलब्ध नहीं है।

सिर्फ 30% मामलों तक पहुंच पा रहे स्वास्थ्यकर्मी

पूर्वी कांगो में जारी अस्थिरता के कारण स्वास्थ्यकर्मियों के लिए संक्रमित लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। WHO के मुताबिक, स्वास्थ्यकर्मी फिलहाल करीब 30% मामलों तक ही पहुंच पा रहे हैं।

पहली वैक्सीन का मानव परीक्षण जल्द

ब्रिटेन की MHRA ने Bundibugyo इबोला वैक्सीन के मानव परीक्षण की अनुमति दे दी है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम इसे ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड वैक्सीन में इस्तेमाल तकनीक के आधार पर विकसित कर रही है।

कैसे फैलता है इबोला ?

इबोला संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी या अन्य संक्रमित शारीरिक द्रव्यों के संपर्क से फैल सकता है। इसके लक्षण संक्रमण के 2 से 21 दिन के भीतर सामने आ सकते हैं। शुरुआत में बुखार, सिरदर्द और थकान जैसे लक्षण होते हैं, जबकि गंभीर स्थिति में उल्टी, दस्त और अंगों के काम करना बंद करने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।


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