Share This Article रायपुर, 26 अगस्त 2026/ Bhote Koshi Flood : हिमालयी क्षेत्र में भोटे कोशी नदी के अचानक उफान ने नेपाल के सिंधुपाल्चोक समेत आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचा दी। तेज बहाव और मलबे की चपेट में आने से पुल, सड़कें और कई संरचनाएं प्रभावित हुईं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक हादसे में 72 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 450 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 133 भारतीय नागरिक शामिल होने की बात सामने आई है। वीडियो में भोटे कोशी का रौद्र रूप दिखाई दे रहा है। संकरी हिमालयी घाटियों में नदी का पानी बेहद तेज गति से बहता नजर आया। मटमैले पानी के साथ चट्टानों और मलबे का बहाव कई जगह तबाही का कारण बना। आखिर क्या है भोटे कोशी? नाम सुनने में भले ही भारत में कम जाना-पहचाना हो, लेकिन भोटे कोशी का संबंध आगे चलकर बिहार की कोसी नदी से जुड़ता है। नेपाली भाषा में ‘भोटे’ या ‘भोटिया’ का अर्थ तिब्बत से आने वाला और ‘कोशी’ का अर्थ नदी होता है। इस तरह भोटे कोशी का अर्थ हुआ- ‘तिब्बत से आने वाली नदी।’ तिब्बत में इसे पोइक्वु या मत्सांग त्सांगपो नाम से भी जाना जाता है। तिब्बत से नेपाल और फिर भारत तक पहुंचती है नदी भोटे कोशी का उद्गम तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित हिमालयी क्षेत्र से माना जाता है। ऊंचे ग्लेशियरों और हिमालयी इलाके से निकलकर नदी दक्षिण की ओर बहती हुई नेपाल में प्रवेश करती है। नेपाल के सिंधुपाल्चोक जिले में यह नदी गहरी घाटियों और खड़ी ढलानों से होकर गुजरती है। यहां नदी का बहाव बेहद तेज रहता है, यही वजह है कि भोटे कोशी को नेपाल की प्रमुख राफ्टिंग और कयाकिंग नदियों में गिना जाता है। नेपाल में बाह्रबीसे के बाद इसका प्रवाह सुन कोशी से जुड़ता है। आगे अरुण, तामोर समेत अन्य नदियों के साथ मिलकर यह सप्तकोशी नदी तंत्र का हिस्सा बनती है। सप्तकोशी आगे भारत के बिहार में प्रवेश करती है और यहां इसे कोसी नदी के नाम से जाना जाता है। यही वह नदी है जिसे बिहार में लंबे समय से ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है। एक नदी, कई नाम और दो देशों तक असर भोटे कोशी की कहानी सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है। तिब्बत से निकलने वाली यह नदी नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से गुजरते हुए आगे कोसी नदी तंत्र का हिस्सा बनती है। यही वजह है कि 26 अगस्त की घटना को समझने के लिए भोटे कोशी के पूरे नदी तंत्र को समझना जरूरी है। अचानक इतना खतरनाक कैसे हुआ बहाव? भोटे कोशी की सबसे बड़ी ताकत ही उसका सबसे बड़ा खतरा भी है। यह नदी ऊंचे हिमालयी क्षेत्र से बहुत तेजी से नीचे उतरती है। इसके कैचमेंट क्षेत्र में ग्लेशियर, बर्फ, चट्टान और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। यदि ऊपरी हिमालय में अचानक बर्फ, चट्टान या मलबा खिसकता है और बड़ी मात्रा में पानी नदी में पहुंचता है, तो कुछ ही समय में नदी का जलस्तर और बहाव बेहद खतरनाक हो सकता है। प्रारंभिक आकलनों में भी बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने या हिमस्खलन की आशंका जताई गई है। हालांकि घटना का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और जांच जारी है। कैसे पहुंची तबाही दोनों देशों तक? हिमालय के ऊपरी हिस्से में अचानक पानी और मलबे का बड़ा प्रवाह बनने के बाद यह संकरी घाटियों से नीचे की ओर तेजी से बढ़ा। सबसे पहले इसका असर तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में बताया गया। इसके बाद पानी नेपाल की ओर बढ़ा और रसुवा जिले के तिमुरे, स्याफ्रूबेसी समेत आसपास के इलाकों को प्रभावित किया। तेज पानी और मलबे के कारण सड़कें, पुल, घर और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा। इसके बाद बाढ़ का प्रभाव नेपाल के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंचा। क्यों खतरनाक है भोटे कोशी? आगे चलकर यह कोसी नदी तंत्र का हिस्सा बनती है। ऊंचे हिमालयी ग्लेशियर क्षेत्र से निकलती है। नदी का ढाल कई हिस्सों में बेहद तीखा है। संकरी घाटियों के कारण पानी का दबाव तेजी से बढ़ सकता है। भूस्खलन और हिमस्खलन से अचानक मलबा नदी में आ सकता है। Share This Article Post navigation भारत में खाद की कमी नहीं होगी…! रूस ने बढ़ाई सप्लाई, किसानों को बड़ी राहत