Major improvement in defense exportsMajor improvement in defense exports
Share This Article

रायपुर, 29 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने रक्षा निर्यात की प्रक्रिया को आसान करते हुए कई नियमों में बदलाव किया है।

अधिकांश देशों को गैर-घातक रक्षा सामग्री के निर्यात के लिए अब अलग-अलग हितधारकों से सलाह लेने की जरूरत नहीं होगी। अंतरराष्ट्रीय टेंडर और प्रदर्शनियों के लिए निर्यात प्रक्रिया भी सरल की गई है।

निर्यात प्रक्रिया होगी तेज

अधिकांश गंतव्यों के लिए गैर-घातक रक्षा सामग्री के निर्यात में हितधारक परामर्श की अनिवार्यता खत्म की गई है।

हालांकि संवेदनशील देशों के मामले में सुरक्षा उपाय जारी रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय टेंडर और प्रदर्शनियों के लिए सभी सामग्रियों के निर्यात को भी आसान बनाया गया है।

OGEL नियम भी हुए आसान

ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) के तहत तीन अलग-अलग प्रक्रियाओं को मिलाकर एक सरल SOP बनाई गई है। इसकी वैधता 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है और इसका दायरा भी बढ़ाया गया है। इससे कंपनियों को बार-बार अनुमति लेने की जरूरत कम होगी।

रक्षा निर्यात ने बनाया रिकॉर्ड

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष से 62.66% अधिक है। भारत अब 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है और रक्षा निर्यातकों की संख्या बढ़कर 145 हो गई है।

रक्षा उत्पादन भी ऐतिहासिक ऊंचाई पर

भारत का रक्षा उत्पादन भी वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। 2014 में यह करीब ₹46,000 करोड़ था।

सरकार का लक्ष्य भारत को एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी वैश्विक रक्षा विनिर्माण एवं निर्यात केंद्र बनाना है।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

इन सुधारों से खासकर भारतीय रक्षा कंपनियों और MSME क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से अवसर तलाशने में मदद मिलेगी।

सरकार का कहना है कि प्रक्रियाएं आसान करने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रावधान पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं।


Share This Article