Share This Article रायपुर, 02 सितंबर। LPG Consumption : भारत में रसोई गैस यानी LPG की खपत में अगस्त 2026 के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में देश की LPG खपत 2.42 मिलियन टन रही, जबकि अगस्त 2025 में यह 2.89 मिलियन टन थी। यानी सालाना आधार पर LPG खपत करीब 16.15% कम हुई है। पांच महीने में भी लगातार गिरावट LPG खपत में कमी केवल अगस्त तक सीमित नहीं है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच देश में कुल LPG खपत 15.89% घटकर 11.29 मिलियन टन रह गई। पिछले साल इसी अवधि में खपत 13.42 मिलियन टन थी। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि LPG की खपत में गिरावट पिछले कुछ महीनों से बनी हुई है। आखिर क्यों कम हुई LPG की खपत? LPG की खपत में कमी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। वेस्ट एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी सप्लाई संबंधी परेशानियों के बीच भारत में LPG की उपलब्धता पर दबाव पड़ा है। भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में व्यवधान का असर घरेलू बाजार तक पहुंच सकता है। सप्लाई पर दबाव और उपलब्धता में कमी ने LPG की खपत के आंकड़ों को प्रभावित किया है। सरकार बढ़ा रही PNG का दायरा घरेलू ईंधन की जरूरतों में LPG पर निर्भरता कम करने के लिए शहरों में PNG कनेक्शन का विस्तार भी किया जा रहा है। हालांकि, LPG खपत में मौजूदा गिरावट को केवल PNG की बढ़ती पहुंच से जोड़ना सही नहीं होगा, क्योंकि सप्लाई से जुड़ी परिस्थितियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। LPG घटा तो पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी सबसे दिलचस्प बात यह है कि जहां LPG की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज हुई, वहीं पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी हुई। अगस्त 2026 में देश में पेट्रोल की खपत 7.88% बढ़कर 3.82 मिलियन टन हो गई। अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 3.54 मिलियन टन था। वहीं डीजल की खपत भी 6.46% बढ़कर करीब 7 मिलियन टन पहुंच गई, जबकि पिछले साल अगस्त में यह 6.58 मिलियन टन थी। रसोई गैस से लेकर ईंधन बाजार तक बड़ा बदलाव अगस्त के आंकड़े भारत के ईंधन बाजार में अलग-अलग उत्पादों की मांग में बड़ा अंतर दिखाते हैं। LPG की खपत में जहां दोहरे अंक की गिरावट आई है, वहीं पेट्रोल और डीजल की मांग में वृद्धि दर्ज हुई है। आने वाले महीनों में LPG की सप्लाई, आयात की स्थिति और घरेलू ईंधन की मांग के आंकड़े यह तय करने में अहम होंगे कि यह गिरावट अस्थायी है या खपत में किसी बड़े बदलाव का संकेत। Share This Article Post navigation Zomato ने एनालॉग पनीर पर लगाई रोक, जानिए क्या है यह उत्पाद और क्यों उठे सवाल