Share This Article रायपुर, 02 सितंबर / ETrendingIndia / भारतीय रेल की ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ (वन स्टेशन वन प्रोडक्ट – ओएसओपी ) योजना ग्रामीण कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्यमियों के लिए बड़ी ताकत बनकर उभरी है। रेल मंत्रालय के अनुसार देशभर के 1,700 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर 2,000 से अधिक ओएसओपी आउटलेट संचालित हो रहे हैं। इनके माध्यम से अब तक 162.39 करोड़ रुपये की बिक्री हो चुकी है और करीब 1 लाख 54 हजार लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देना और रेलवे स्टेशनों को स्थानीय उत्पादों के प्रमोशन हब के रूप में विकसित करना है। लाखों यात्रियों की आवाजाही वाले स्टेशनों पर इन उत्पादों को बिक्री का मंच मिलने से कारीगरों को बिना बिचौलिये के सीधा बाजार मिल रहा है। ओएसओपी स्टॉलों पर हस्तशिल्प, हैंडलूम, खादी, कपड़ा, खिलौने, चमड़े के उत्पाद, पारंपरिक आभूषण और स्थानीय खाद्य उत्पादों की बिक्री हो रही है। इसमें क्षेत्रीय पहचान वाले उत्पादों को विशेष तरजीह दी जा रही है। बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग और भागलपुरी सिल्क, असम का गमोसा और मेखला चादर, राजस्थान का कोटा डोरिया और सांगानेरी प्रिंट, कर्नाटक के चन्नापटना के लकड़ी के खिलौने, तमिलनाडु की कांचीपुरम सिल्क साड़ियां, महाराष्ट्र की कोल्हापुरी चप्पल और उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद ब्रासवेयर जैसे उत्पाद यात्रियों में खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 378 ओएसओपी इकाइयां चल रही हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 205, तमिलनाडु में 199 और उत्तर प्रदेश में 196 इकाइयां संचालित हैं। छोटे उत्पादकों की भागीदारी आसान बनाने के लिए रेलवे ने पंजीकरण प्रक्रिया बेहद सरल रखी है। 15 दिनों के लिए स्टेशन की श्रेणी के अनुसार मात्र 500 से 1,000 रुपये शुल्क रखा गया है। इसके साथ ही यूपीआई , भीम , पीओएस मशीन और डिजिटल वॉलेट जैसे कैशलेस भुगतान को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि बिक्री में पारदर्शिता बनी रहे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ओएसओपी योजना का लगातार विस्तार किया जा रहा है और आने वाले महीनों में और अधिक स्टेशनों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार मिलेगा। Share This Article Post navigation देश की शीर्ष एयरलाइंस में मिलीं गंभीर खामियां, डीजीसीए के ऑडिट में हुआ खुलासा