Modi-Putin meetingModi-Putin meeting
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 रायपुर, 10 सितंबर 2026। ETrendingIndia / राजधानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें रूस से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 लड़ाकू विमान खरीदने और एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली से जुड़े विषय प्रमुख हो सकते हैं।


रिपोर्ट के अनुसार, भारत और रूस के बीच करीब 75 सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। संभावित सौदे की कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।


इस संबंध में रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव से सवाल किया गया। उन्होंने संकेत दिया कि भारत को सुखोई-57 विमानों की बिक्री का मुद्दा दोनों देशों के बीच चर्चा के एजेंडे में शामिल है।


हालांकि, भारत की प्राथमिकता केवल तैयार विमान खरीदने की नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और देश में ही उत्पादन को बढ़ावा देने की बताई जा रही है। भारत अपनी मौजूदा रक्षा खरीद नीति के तहत विदेशी हथियार प्रणालियों के सीधे आयात के बजाय घरेलू विनिर्माण, स्थानीय संयोजन और तकनीकी क्षमता विकसित करने पर अधिक जोर दे रहा है।


पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से जुड़ी तकनीक बेहद संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में सुखोई-57 की तकनीक भारत को किस स्तर तक हस्तांतरित की जाएगी और देश में इसका कितना उत्पादन संभव होगा, यह बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।


भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी के माध्यम से देश में उत्पादन क्षमता विकसित करने पर जोर देता रहा है। ऐसे में सुखोई-57 से जुड़ा कोई भी संभावित समझौता केवल विमान खरीद तक सीमित रहने के बजाय तकनीकी सहयोग और उत्पादन से भी जुड़ सकता है।


भारत और रूस के बीच एस-400 वायु रक्षा प्रणाली को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत ने वर्ष 2018 में रूस के साथ पांच एस-400 प्रणालियों की खरीद के लिए करीब 5.43 अरब डॉलर का समझौता किया था।


अब तक तीन प्रणालियां भारत को मिल चुकी हैं, जबकि शेष दो प्रणालियों की आपूर्ति इसी वर्ष होने की उम्मीद जताई गई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने संकेत दिया है कि रूस अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।


इसके अलावा भारत कुछ और एस-400 प्रणालियां खरीदने पर भी विचार कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की निविदा के जवाब में रूस की ओर से प्रस्ताव भी दिया गया है।


भारत और रूस के बीच संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल भी दोनों देशों के रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह एक अतिध्वनि गति वाली क्रूज मिसाइल है, जिसे जमीन आधारित प्रक्षेपकों, युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों समेत विभिन्न सैन्य मंचों पर तैनात किया जा सकता है।
रूस ने ब्रह्मोस को और आधुनिक बनाने तथा उसकी क्षमताओं में वृद्धि करने की इच्छा भी जताई है। पेस्कोव के अनुसार, अब इन मिसाइलों में सुधार, अतिरिक्त विशेषताएं जोडऩे और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी तथा प्रभावी बनाने पर विचार करने का समय आ गया है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जून में भारत को सुखोई-57 उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा था कि रूस पांचवीं पीढ़ी की इस तकनीक पर भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।


पुतिन ने इसे दोनों देशों की संयुक्त परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने और भारत को विमान उपलब्ध कराने के साथ इसके विकास को जारी रखने की इच्छा जताई थी। इसके बाद से ही भारत की ओर से सुखोई-57 की संभावित खरीद को लेकर चर्चा तेज हुई है।


सुखोई-57 एक एकल-सीट वाला पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। इसकी लंबाई करीब 19.8 मीटर और ऊंचाई करीब 4.74 मीटर बताई जाती है। विमान का वजन करीब 18 हजार किलोग्राम है और यह लगभग 35 हजार किलोग्राम के अधिकतम उड़ान भार के साथ उड़ान भरने में सक्षम है।


इसकी अधिकतम गति करीब 2,100 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है और यह एक बार में लगभग 3,500 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। नाटो द्वारा इसे ‘फेलनÓ नाम दिया गया है। इसे अमेरिका के एफ-35 और चीन के आधुनिक लड़ाकू विमानों के मुकाबले रूस की प्रमुख लड़ाकू विमान परियोजनाओं में गिना जाता है।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित बैठक में इन रक्षा सौदों के अलावा दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक और रक्षा सहयोग पर भी बातचीत होने की संभावना है। हालांकि, किसी भी संभावित समझौते की अंतिम शर्तें आधिकारिक वार्ता के बाद ही स्पष्ट होंगी।


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