Umar NabiUmar Nabi
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 रायपुर, 10 सितंबर 2026। ETrendingIndia /रायपुर, 10 सितंबर 2026। ETrendingIndia / दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी के आरोपपत्र में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह विस्फोट आत्मघाती बम हमला था। आरोपपत्र में कहा गया है कि कार चला रहे आरोपी उमर उन नबी ने कार के भीतर रहते हुए ही विस्फोटक उपकरण को सक्रिय किया था।


राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने हमले से जुड़े कथित अंसार गजवत-उल-हिंद मॉड्यूल का भी आरोपपत्र में उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, हमले की साजिश अचानक नहीं रची गई थी, बल्कि कथित तौर पर कई वर्षों से इसकी तैयारी चल रही थी।


आरोपपत्र के मुताबिक, विस्फोट के समय उमर उन नबी कार के भीतर मौजूद था। उसने कथित तौर पर एक विशेष नियंत्रण तंत्र का इस्तेमाल करते हुए आईईडी यानी स्वनिर्मित विस्फोटक उपकरण को सक्रिय किया।


जांच एजेंसी के अनुसार, हमले की योजना के पीछे शामिल आरोपी कथित तौर पर चरमपंथी सामग्री से प्रभावित थे। आरोपपत्र में एक तथाकथित ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक/हाउ टू बिकम एन असैसिनÓ का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने इसे अरब प्रायद्वीप में सक्रिय अल-कायदा से जुड़े एक कथित मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में बताया है।


राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आरोपपत्र में कहा है कि आरोपियों से बरामद दस्तावेजों में विस्फोटक, हथियार, गुप्त अभियान और आईईडी से संबंधित सामग्री शामिल थी।


जांच में सामने आए दस्तावेजों में टीएटीपी और दूर से नियंत्रित किए जाने वाले विस्फोटों के संदर्भ भी मिले। इसके अलावा युद्ध, निगरानी, सुरक्षा बलों से बच निकलने और अन्य गुप्त गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी बरामद होने का दावा किया गया है।


आरोपपत्र में एक प्रचार दस्तावेज का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस दस्तावेज में लगातार सशस्त्र संघर्ष और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने की वकालत की गई थी।


दस्तावेज में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को कथित तौर पर ‘शैतानी और अत्याचारी बताया गया था। एजेंसी ने इन सामग्रियों को आरोपियों की कथित चरमपंथी विचारधारा से जोड़कर देखा है।


राष्ट्रीय जांच एजेंसी के आरोपपत्र के अनुसार, हमले की तैयारी के तहत आरोपी दिसंबर 2023 से लाल किले और उसके आसपास के इलाकों की बार-बार रेकी कर रहे थे।


जांच एजेंसी का कहना है कि उमर उन नबी ने अन्य आरोपियों के साथ लाल किले का कई बार दौरा किया था। इन दौरों का उद्देश्य कथित तौर पर इलाके की निगरानी और हमले के लिए परिस्थितियों का आकलन करना था।


आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि विस्फोट उस स्थान और तारीख पर नहीं किया गया था, जिसकी पहले योजना बनाई गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, मामले से जुड़े कई आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उमर उन नबी को भी पकड़े जाने का डर सताने लगा था।


एजेंसी का आरोप है कि इसी डर के कारण उमर ने जल्दबाजी में हमले को अंजाम दिया और कार में मौजूद विस्फोटक को सक्रिय कर दिया।
10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक सफेद कार में जोरदार विस्फोट हुआ था। इस घटना में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे।


घटना के बाद शुरुआती जांच में इसके तार जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़े होने की बात सामने आई थी। इसके बाद फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के कई चिकित्सकों और कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। मामले की जांच का दायरा इसके बाद उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैल गया था। अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी के आरोपपत्र में हमले की कथित साजिश, आरोपियों की गतिविधियों, रेकी और विस्फोट की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आई है।


हालांकि, आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।


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