SIR Notice: From Mahesh Babu to Saina Nehwal—big names receive SIR notices; find out why the Election Commission issued them.SIR Notice
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हैदराबाद, 11 सितंबर 2026। SIR Notice : तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से बड़ी खबर सामने आई है। चुनाव आयोग की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया के तहत शहर की कई जानी-मानी हस्तियों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इस सूची में अभिनेता महेश बाबू, फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली, पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण और बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल समेत फिल्म, खेल और बिजनेस जगत से जुड़े कई चर्चित नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

महेश बाबू और एसएस राजामौली समेत कई बड़े नाम

सूत्रों के मुताबिक, SIR नोटिस पाने वालों की सूची में महेश बाबू के साथ उनकी पत्नी नम्रता, एसएस राजामौली, वेंकटेश दग्गुबाती और उनकी बेटियां, समांथा रुथ प्रभु, विजय देवरकोंडा, आनंद देवरकोंडा, वीवीएस लक्ष्मण, मिताली राज, पुलेला गोपीचंद, साइना नेहवाल, मुरली कृष्ण प्रसाद दिवि और उपासना कोंडिडेला के नाम शामिल हैं। यानी चुनावी मतदाता सूची के सत्यापन की यह प्रक्रिया केवल फिल्मी सितारों तक सीमित नहीं है।

आखिर क्यों भेजा गया SIR का नोटिस?

जानकारी के अनुसार SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच, सत्यापन और आवश्यक सुधार करना है। कुछ मामलों में मतदाताओं के नाम या उनके माता-पिता के नाम में अंतर अथवा गड़बड़ी सामने आई है। वहीं कुछ रिकॉर्ड पुराने SIR डेटा से मैच नहीं हो पाए हैं। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं से सत्यापन और जरूरी दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। कुछ मामलों में नोटिस भेजे जाने की विशेष वजह स्पष्ट नहीं बताई गई है।

नोटिस मिलने के बाद क्या करना होगा?

चुनाव अधिकारियों के अनुसार नोटिस प्राप्त करने वाले लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत खुद उपस्थित होकर वेरिफिकेशन करा सकते हैं और आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं। यदि मतदाता सूची में नाम या अन्य जानकारी में कोई गलती है तो उसे सुधारने का अवसर भी दिया जा सकता है। जो व्यक्ति खुद उपस्थित नहीं हो सकते, वे अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को अधिकृत कर सकते हैं।

SIR नोटिस का मतलब वोट रद्द होना नहीं

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ SIR नोटिस मिलने का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को मतदान के अधिकार से अयोग्य घोषित कर दिया गया है या उसका मतदाता पंजीकरण रद्द हो गया है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद सत्यापन, आपत्तियों और सुधार की प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों की जांच की जाती है। इसलिए नोटिस को मतदाता सूची को अपडेट और दुरुस्त करने की प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए।


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