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रायपुर, 11 सितंबर 2026। ETrendingIndia / म्यांमार के दूसरे सबसे व्यस्त मंडाले अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को सुरक्षा कारणों और रखरखाव का हवाला देते हुए दो दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह फैसला हवाईअड्डा परिसर में हुए एक खतरनाक ड्रोन हमले के ठीक एक दिन बाद लिया गया। सैन्य समर्थित म्यांमार सरकार ने हमले के पीछे लोकतंत्र समर्थक विद्रोही गुटों का हाथ होने का आरोप लगाया है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को छह आत्मघाती ड्रोन ने मंडाले हवाईअड्डे के क्षेत्र को निशाना बनाया। हालांकि, सरकारी बयान के मुताबिक सुरक्षा बलों ने समय रहते वायु रक्षा प्रणाली की मदद से ड्रोन में मौजूद विस्फोटक सामग्री को निष्क्रिय कर दिया। इससे बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान को टाला जा सका।


हमले के बाद कुछ घरेलू उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ और कई उड़ानों में देरी दर्ज की गई। सुरक्षा स्थिति को देखते हुए हवाईअड्डे को रविवार तक पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया गया है।


म्यांमार के एक अन्य हवाईअड्डे पर तैनात सुरक्षा अधिकारी ने भी मंडाले हवाईअड्डे के बंद होने की पुष्टि की है। अधिकारी के अनुसार, देश के इस महत्वपूर्ण विमानन केंद्र को अस्थायी रूप से बंद किया गया है और इसके लिए रखरखाव को कारण बताया गया है।


मध्य म्यांमार में स्थित मंडाले अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का प्रमुख केंद्र है। हालांकि, नागरिक विमानन सुरक्षा से जुड़े समूहों का दावा है कि इस हवाईअड्डे की सुविधा का इस्तेमाल सैन्य लड़ाकू विमानों के लिए हवाई पट्टी के तौर पर भी किया जाता है।


म्यांमार वर्ष 2021 में आंग सान सू की की निर्वाचित लोकतांत्रिक सरकार को सेना द्वारा अपदस्थ किए जाने के बाद से गंभीर गृहयुद्ध की स्थिति से गुजर रहा है। सैन्य सरकार ने हालिया ड्रोन हमले के लिए ‘पीपल डिफेंस फोर्सेजÓ यानी जन रक्षा बल नामक लोकतंत्र समर्थक विद्रोही संगठन को जिम्मेदार ठहराया है।


दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पिछले करीब पांच वर्षों से जारी संघर्ष में म्यांमार की सेना और विद्रोही गुट दोनों ही बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ड्रोन अब इस संघर्ष में हमले के प्रमुख साधनों में शामिल हो चुके हैं।

म्यांमार की सेना के पास रूस और चीन से प्राप्त लड़ाकू विमानों की ताकत है, जिससे उसे संघर्ष में हवाई बढ़त हासिल होती है। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने सेना पर हवाई हमलों के दौरान आम नागरिकों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।


स्वतंत्र निगरानी संगठनों के अनुसार, म्यांमार में सेना और विद्रोही गुटों के बीच जारी संघर्ष में अब तक एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में मंडाले अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुआ ड्रोन हमला और उसके बाद हवाईअड्डे को बंद करने का निर्णय देश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।


हवाईअड्डे को बंद किए जाने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर भी असर पडऩे की आशंका है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और रखरखाव के बाद हवाईअड्डे को दोबारा खोलने का निर्णय लिया जाएगा।


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