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ईरान, 12 सितंबर 2026/ Iran : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान किसी भी तरह की दादागीरी या ‘अहंकार’ के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा। देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती के साथ खड़ा रहेगा।

विदेशी दबाव के खिलाफ ईरान का सख्त रुख

धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और कारोबारी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान अपने मूल हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। उन्होंने विदेशी ताकतों पर ईरानी समाज के भीतर मतभेद पैदा करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि देश के भीतर विभाजन पैदा करने वाली किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के साथ-साथ कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं।

खाड़ी में शांति और सहयोग का संदेश

कड़े तेवरों के बीच पेजेश्कियान ने खाड़ी क्षेत्र में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सहयोग की प्रतिबद्धता भी दोहराई। ईरान की ओर से यह संदेश ऐसे समय दिया गया है, जब क्षेत्रीय तनाव का असर समुद्री सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जैसे अहम मुद्दों पर भी देखा जा रहा है।

भारत के साथ बातचीत में भी क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर

भारत और ईरान के बीच हालिया बातचीत में भी पश्चिम एशिया की स्थिति, क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और व्यापार की सुरक्षा जैसे मुद्दे अहम रहे हैं। ऐसे में पेजेश्कियान का बयान एक तरफ ईरान के सख्त रुख को सामने रखता है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय देशों के साथ संवाद बनाए रखने की उसकी कोशिश भी दिखाई देती है।

तनाव के बीच कूटनीति की राह कितनी अहम?

ईरान के राष्ट्रपति के ताजा बयान से साफ है कि तेहरान विदेशी दबाव के सामने अपनी नीतियों में पीछे हटने के मूड में नहीं है। हालांकि, खाड़ी क्षेत्र में शांति और सहयोग की बात करके ईरान ने कूटनीतिक रास्ता भी खुला रखा है। अब नजर इस बात पर होगी कि अमेरिका-इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान का यह रुख पश्चिम एशिया की आगे की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।


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