Krishak Unnati Yojana: Cash crops now booming in the 'Rice Bowl'; modern farming is transforming farmers' fortunes, with the government focusing on boosting incomes.Krishak Unnati Yojana
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रायपुर, 12 सितंबर। Krishak Unnati Yojana : छत्तीसगढ़ की पहचान भले ही लंबे समय से ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही हो, लेकिन अब प्रदेश की कृषि व्यवस्था तेजी से बदल रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की पहल से किसान पारंपरिक धान की खेती के साथ अदरक, गेंदा, फल-सब्जी, मसाले और दूसरी नगदी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। आधुनिक तकनीक, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ाव ने खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय के नए स्रोत के रूप में मजबूत किया है।

धान के साथ अदरक, गेंदा और बागवानी से बढ़ रही कमाई

प्रदेश के किसान अब केवल धान पर निर्भर नहीं हैं। अदरक, गेंदा फूल और अन्य बागवानी फसलों के साथ मछली पालन, मुर्गी पालन और पशुपालन को जोड़कर किसान अपनी आय के कई स्रोत तैयार कर रहे हैं। युवा किसान खेती को पारंपरिक काम के बजाय आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में खेती की तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दे रही है।

खेती का रकबा बढ़ा, खरीफ उत्पादन में 17% और रबी में 20% वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के ढाई वर्षों से अधिक के कार्यकाल में प्रदेश में खेती के रकबे के साथ उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और रबी फसलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है। बेहतर बीज, उर्वरक, सिंचाई सुविधाओं और कृषि यंत्रीकरण तक किसानों की बढ़ती पहुंच को इस बदलाव की अहम वजह माना गया है।

किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ फसल के धान पर आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 1 करोड़ 3 लाख 34 हजार क्विंटल से अधिक गन्ने की खरीदी कर 32,955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

25 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में पहुंची 35,892 करोड़ की सहायता

कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से 2025 तक करीब 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की गई। इसके अलावा फसल बीमा योजना के तहत खरीफ सीजन में 15.92 लाख से अधिक और रबी सीजन में 2.99 लाख किसानों को शामिल किया गया।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत भी प्रदेश के किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये सहित अब तक 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।

फसल विविधीकरण पर जोर, किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ सरकार अब किसानों को धान के साथ दूसरी फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। फसल विविधीकरण के तहत किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। इसके तहत अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी दलहन फसलों के साथ सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल जैसी तिलहन फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इसके अलावा मक्का, कपास और कोदो, कुटकी, रागी व बाजरा जैसे मोटे अनाजों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ एक ही फसल पर निर्भरता और कृषि जोखिम को कम करना है।

ड्रोन से फार्म मशीनरी बैंक तक, खेती में बढ़ी आधुनिक तकनीक

छत्तीसगढ़ के गांवों में कृषि तकनीक का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। फार्म मशीनरी बैंक के जरिए छोटे किसान किराये पर महंगी कृषि मशीनें हासिल कर पा रहे हैं। इससे खेती की श्रम लागत कम करने और समय पर कृषि कार्य पूरा करने में मदद मिल रही है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का विस्तार हुआ है। वहीं ड्रोन और आधुनिक कृषि उपकरणों के इस्तेमाल से खेती में दक्षता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। पिछले वर्ष 57 हजार से अधिक किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती अपनाना भी टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर सामने आया है।

बागवानी का रकबा 8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा

प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में बागवानी का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। पिछले ढाई वर्षों में बागवानी का क्षेत्रफल 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। फल, सब्जी, मसाले और फूलों के साथ तेल पाम और बांस जैसी फसलों का विस्तार किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा कर रहा है।

अब चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की उपज को बेहतर बाजार, प्रसंस्करण और उचित मूल्य से जोड़ना भी है। इसी दिशा में पैक हाउस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी अधोसंरचनाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण और बाजार से बेहतर जुड़ाव के जरिए छत्तीसगढ़ की खेती अब पारंपरिक धान उत्पादन से आगे बढ़कर किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने वाली नई कृषि व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।


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