Share This Article रायपुर, 13 सितंबर 2026। ETrendingIndia / ओडिशा के जंगल से मिले पांच ऑरंगुटान बच्चों को उनके मूल देश इंडोनेशिया वापस भेजने की तैयारी तेज हो गई है। ऑरंगुटान भारत-इंडोनेशिया वापसी मामले में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशियाई अधिकारी भारत की संबंधित एजेंसियों के संपर्क में हैं। दोनों देशों के बीच इन दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षित वापसी को लेकर समन्वय किया जा रहा है। बालासोर के जंगल से मिले थे ऑरंगुटान पांचों ऑरंगुटान को 8 सितंबर को ओडिशा के बालासोर जिले के बिचित्रापुर वन क्षेत्र से बचाया गया था। इसके बाद उन्हें देखभाल के लिए भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क भेजा गया। इनमें तीन नर और दो मादा ऑरंगुटान शामिल हैं। उनकी उम्र करीब छह महीने से एक साल के बीच बताई गई है। ऑरंगुटान भारत-इंडोनेशिया वापसी की प्रक्रिया में उनकी पहचान और मूल स्रोत की पुष्टि भी महत्वपूर्ण है। इसी कारण मामले में DNA जांच की दिशा में भी आगे बढ़ा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की आशंका पांचों ऑरंगुटान के ओडिशा के जंगल तक पहुंचने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। प्रारंभिक स्तर पर इसे अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दुर्लभ वन्यजीव भारत तक कैसे पहुंचे। साथ ही, इनके परिवहन के पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। भारत और इंडोनेशिया के बीच समन्वय इंडोनेशियाई अधिकारियों के अनुसार, ऑरंगुटान मिलने के बाद से ही भारत की संबंधित एजेंसियों के साथ संपर्क किया जा रहा है। दोनों देशों के अधिकारी आगे की प्रक्रिया को तेज करने में जुटे हैं। इसके अलावा, ऑरंगुटान भारत-इंडोनेशिया वापसी के लिए जरूरी कानूनी और संरक्षण संबंधी प्रक्रियाओं पर भी काम किया जा रहा है। DNA जांच के परिणाम इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं। नंदनकानन में हो रही देखभाल फिलहाल पांचों ऑरंगुटान नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में हैं। यहां उनकी सेहत और जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ रखना है। इसके बाद उनकी मूल पहचान और तस्करी से जुड़े तथ्यों की जांच आगे बढ़ेगी। Share This Article Post navigation बालासोर में मिले पांच ऑरंगुटान बच्चों की होगी तस्करी की जांच, ओडिशा नहीं बनेगा विदेशी वन्यजीवों का मार्ग: मुख्यमंत्री