Mizoram's Rail LifelineMizoram's Rail Lifeline
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रायपुर, 15 सितंबर / ETrendingIndia / बैराबी–सैरांग रेल लाइन के शुरू होने के एक साल में मिजोरम की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया है। 51.38 किमी लंबी इस रेल लाइन से अब राजधानी आइजोल के करीब तक यात्री और माल पहुंच रहे हैं।

1,100 से ज्यादा ट्रेन यात्राओं में 15 लाख से अधिक यात्रियों ने सफर किया, जबकि 2,500 से ज्यादा माल वैगन सैरांग पहुंचे।

रेल संपर्क ने पर्यटन, व्यापार, निर्माण और स्थानीय उत्पादों के लिए भी नए अवसर खोले हैं।

देश के प्रमुख शहरों से सीधा जुड़ा मिजोरम

13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैराबी–सैरांग रेल लाइन और सैरांग स्टेशन का उद्घाटन किया था। इसके बाद मिजोरम को दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और सिलचर से बेहतर रेल संपर्क मिला।

सैरांग–आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस ने राज्य को राष्ट्रीय राजधानी से सीधा प्रीमियम रेल संपर्क दिया है।

15 लाख से ज्यादा यात्रियों ने किया सफर

एक साल में रेल सेवाओं ने 1,100 से अधिक यात्राएं पूरी कीं और 15 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुविधा मिली। ट्रेनों में औसत क्षमता उपयोग 100% से अधिक रहा। सैरांग स्टेशन ने अकेले 5.54 लाख से अधिक यात्री आवागमन संभाला।

2,500 से ज्यादा माल वैगन पहुंचे

रेल लाइन शुरू होने के बाद सीमेंट, रेत, पत्थर, चावल, खाद, निर्माण सामग्री और ऑटोमोबाइल की आपूर्ति आसान हुई। एक साल में 2,500 से ज्यादा माल वैगन सैरांग पहुंचे।

इससे लंबी सड़क यात्रा पर निर्भरता और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिली।

119 कारों की पहली रेल खेप

दिसंबर 2025 में चांगसारी से 119 मारुति कारों की पहली बड़ी ऑटोमोबाइल खेप रेल से सैरांग पहुंची। इससे मिजोरम में वाहनों की आपूर्ति के लिए तेज और किफायती विकल्प मिला।

पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा

रेल संपर्क के बाद मिजोरम में पर्यटन में 86% से अधिक वृद्धि दर्ज होने का दावा किया गया है। होटल, होमस्टे, रेस्तरां, टैक्सी, गाइड और स्थानीय बाजारों को इसका लाभ मिल रहा है।

विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं के लिए भी बाहर आने-जाने का आसान विकल्प मिला है।

स्थानीय उत्पाद अब पहुंचेंगे देशभर में

19 सितंबर 2025 को सैरांग से पहली पार्सल खेप के रूप में एन्थ्यूरियम फूल दिल्ली भेजे गए। इससे मिजोरम के फूलों, बांस, बेंत, हथकरघा और हस्तशिल्प जैसे उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण

बैराबी–सैरांग रेल लाइन में 45 सुरंगें और 153 पुल हैं। सबसे ऊंचे पुल के पियर की ऊंचाई 114 मीटर है, जो कुतुब मीनार से करीब 42 मीटर अधिक है। लगभग 16 किमी लंबी सुरंगों वाली यह परियोजना मिजोरम के कठिन पहाड़ी भूभाग में रेलवे की बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि मानी जा रही है।

सिर्फ रेल लाइन नहीं, विकास की नई राह

एक साल का अनुभव बताता है कि बैराबी–सैरांग रेल संपर्क ने मिजोरम में यात्रा, व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और माल परिवहन को नई गति दी है। रेल अब राज्य के लिए सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि रोजगार, कारोबार और राष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का नया माध्यम बन रही है।


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