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रायपुर, 16 सितंबर / ETrendingIndia / छत्तीसगढ़ के अंतरराज्यीय मीडिया एक्सपोजर टूर के तीसरे दिन ओडिशा से आए पत्रकारों के दल ने मंगलवार को कोरबा जिले में स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा खदान का दौरा किया।

इस दौरान पत्रकारों ने बड़े पैमाने पर कोयला उत्पादन, आधुनिक खनन तकनीक, सुरक्षा प्रोटोकॉल और कोयला परिवहन की व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

गेवरा खदान पहुंचने पर पत्रकारों के दल का स्वागत एसईसीएल के महाप्रबंधक संजय मिश्रा और महाप्रबंधक (संचालन) धीरज चौधरी ने किया।

संजय मिश्रा ने देश के विकास में कोयले की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी देश के ऊर्जा क्षेत्र की कल्पना कोयले के बिना नहीं की जा सकती।

खाना पकाने के ईंधन से लेकर इंजन और औद्योगिक इकाइयों को ऊर्जा उपलब्ध कराने तक कोयला आज भी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

महाप्रबंधक (संचालन) धीरज चौधरी ने पत्रकारों को गेवरा खदान के संचालन, कोयला उत्पादन, सुरक्षा उपायों और सुरक्षित एवं प्रभावी खनन के लिए अपनाई जा रही कार्यप्रणालियों की जानकारी दी।

उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए किए जा रहे तकनीकी हस्तक्षेपों और प्रबंधन संबंधी उपायों से भी अवगत कराया।

दौरे के दौरान पत्रकारों ने खनन क्षेत्र में प्रवेश कर खदान की गतिविधियों को प्रत्यक्ष देखा।

उन्होंने उच्च क्षमता वाली खनन मशीनरी, कोयला उत्खनन, ऊपरी मिट्टी एवं चट्टानी परतों को हटाने, कोयला प्रबंधन तथा परिवहन की विभिन्न प्रक्रियाओं को समझा।

पत्रकारों को बताया गया कि गेवरा खदान वर्ष 2023-24 में 5.91 करोड़ टन कोयला उत्पादन के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी खुली कोयला खदान रही है। यह खदान सात राज्यों को कोयले की आपूर्ति करती है और भारत के कुल कोयला उत्पादन में लगभग छह प्रतिशत का योगदान देती है।

पत्रकारों को सरफेस माइनर्स, रिपर तकनीक और शोवेल-डंपर संयोजन के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई।

इसके अलावा, उत्पादन की निगरानी और परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट डिजीकोल के तहत किए जा रहे डिजिटल हस्तक्षेपों से अवगत कराया गया।

एसईसीएल की भविष्य की उत्पादन योजनाओं की जानकारी देते हुए धीरज चौधरी ने कहा कि कंपनी अगले वर्ष दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कोयला निकासी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी के अंतर्गत कन्वेयर प्रणाली और रैपिड लोडिंग साइलो की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

दौरे के दौरान एसईसीएल की पर्यावरण संरक्षण संबंधी पहलों की जानकारी भी दी गई। इनमें वनीकरण, मियावाकी पद्धति से पौधरोपण, धूल नियंत्रण, खदान के पानी का प्रबंधन और भूमि पुनर्वास जैसे उपाय शामिल हैं।

इन पहलों के माध्यम से खनन गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के प्रयासों को रेखांकित किया गया।


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