Share This Article रायपुर, 16 सितंबर 2026। ETrendingIndia / भारत सरकार गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की संभावनाओं को बढ़ाने और मछुआरों को अधिक मूल्य वाली समुद्री मछलियों के दोहन से जोड़ने की तैयारी में है। इसके लिए 17 सितंबर 2026 को गांधीनगर में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित होगी। इसमें तकनीक, आधुनिक नावें, वित्त, कौशल, प्रसंस्करण और निर्यात बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। सरकार के अनुसार अब तक 9,650 एक्सेस पास जारी किए जा चुके हैं। गहरे समुद्र की मछली पकड़ने पर फोकस कार्यशाला में भारत के ईईजेड और खुले समुद्र में उपलब्ध अधिक मूल्य वाली प्रजातियों, खासकर टूना और टूना जैसी मछलियों, के सतत दोहन की संभावनाओं पर चर्चा होगी। आधुनिक तकनीक और वैश्विक तरीकों को अपनाने पर भी जोर रहेगा। नावों के आधुनिकीकरण और वित्त पर चर्चा मछली पकड़ने वाले जहाजों के आधुनिकीकरण, मछुआरों के कौशल विकास, संस्थागत वित्त और सहकारी समितियों के जरिए निवेश को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार होगा। 9,650 एक्सेस पास जारी ईईजेड में 12 से 200 समुद्री मील तक मछली पकड़ने के लिए ReALCRaft पोर्टल के जरिए मुफ्त डिजिटल एक्सेस पास जारी किया जाता है। मशीनीकृत जहाजों और 24 मीटर से अधिक लंबी बड़ी मोटर चालित नौकाओं के लिए यह जरूरी है, जबकि पारंपरिक गैर-मोटर चालित और छोटे कारीगर मछुआरों को छूट है। मछली से निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन कार्यशाला में मछली पकड़ने के बाद प्रबंधन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, ट्रेसबिलिटी और निर्यात मानकों पर भी चर्चा होगी। सरकार एक्सेस पास व्यवस्था को MPEDA और EIC जैसी संस्थाओं से जोड़कर प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी को आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है। मछुआरों और सहकारी संस्थाओं की भागीदारी कार्यशाला में केंद्र व राज्य सरकारों के अधिकारी, ICAR, NABARD, NCDC, MPEDA, उद्योग, मत्स्य सहकारी समितियां, FFPO और मछुआरे शामिल होंगे। जुलाई 2026 में खुले समुद्र में सतत मत्स्य दोहन के लिए 10 FFPO और मछुआरों को LoA भी दिए गए थे। क्यों महत्वपूर्ण भारत के पास करीब 11,000 किमी से अधिक समुद्री तट और लगभग 24 लाख वर्ग किमी का EEZ है। सरकार अब गहरे समुद्र के संसाधनों के सतत उपयोग के साथ मछुआरों की आय और समुद्री खाद्य निर्यात बढ़ाने पर जोर दे रही है। Share This Article Post navigation सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ… रूस की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए भारत का कड़ा रुख : पाकिस्तान-चीन सीमा आयोग को बताया अवैध…! कहा- भारतीय क्षेत्र पर कोई समझौता मंजूर नहीं