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 रायपुर, 17 सितंबर 2026 / ETrendingIndia / एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ चुपचाप एक समझौता किया है। इसके मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने कहा है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे।

वहीं, अमेरिका ने वादा किया है कि वो हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की मदद नहीं करेगा। सूत्रों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में ये दावा किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान की राजधानी मस्कट स्थित अमेरिकी दूतावास में अमेरिकी अधिकारियों और हूती विद्रोहियों के बीच बैठक हुई थी।
इसमें हूतियों ने अमेरिका को आश्वासन दिया कि दोनों पक्षों के बीच 2025 में हुआ युद्धविराम समझौता अभी भी लागू है और वे लाल सागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे।


इसी बैठक में अमेरिका ने सऊदी अरब का समर्थन न करने का फैसला किया है।


मार्च, 2025 में ट्रंप प्रशासन ने हूती विद्रोहियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। हालांकि, अमेरिका इस समूह के साथ लगातार बातचीत में शामिल रहा है।

दोनों के बीच पिछले साल मई में युद्धविराम पर भी सहमति बनी थी।


14 सितंबर को अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पुष्टि की थी कि अमेरिका हूती विद्रोहियो के सीधे संपर्क में है।
हाल ही में जो बैठक हुई, उसे आयोजित करने में ओमान की सरकार ने मदद की है।


यमन में अमेरिका के पूर्व उपराजदूत नबील खौरी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन और हूतियों के बीच एक तरह का मौन समझौता हो गया है।
उन्होंने कहा, हूती अमेरिकी प्रशासन को आश्वासन दे रहे हैं कि लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय नौवहन प्रभावित नहीं होगा, लेकिन एकमात्र खतरा सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को है।


सूत्रों ने दावा किया कि हूतियों ने इजरायली जहाजों पर भी हमला न करने का आश्वासन दिया है।
पिछले हफ्ते हूतियों ने अप्रत्याशित तेजी से यमन के लगभग पूरे लाल सागर तट पर कब्जा कर लिया था। इसमें मोखा का ऐतिहासिक बंदरगाह और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के नजदीक पेरिम द्वीप भी शामिल हैं।


यह जलडमरूमध्य लाल सागर के मुहाने पर है और वैश्विक समुद्री परिवहन के लिए अहम रास्ता है।
16 सितंबर को हूतियों ने सऊदी अरब के यानबू में अरामको की एक सुविधा और दक्षिणी सऊदी में एक वायुसेना अड्डे को भी निशाना बनाया था।


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