NASANASA
Share This Article

रायपुर, 17 सितंबर 2026 / ETrendingIndia / वैज्ञानिकों ने चांद पर नया गड्ढा खोजा है, जो करीब दो साल पहले हुए एक बड़े टकराव से बना था। यह घटना इतनी तेज थी कि धरती और अंतरिक्ष में मौजूद दूरबीनें भी इसका तुरंत पता नहीं लगा सकीं। नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने मई, 2024 में इसकी तस्वीरें ली थीं।

हालांकि, डाटा की जांच के दौरान इसकी पहचान काफी देर से हुई। इस खोज से चांद की सतह और वहां होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।


यह क्रेटर करीब 728 फीट चौड़ा और 141 फीट तक गहरा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह हाल के समय में सोलर सिस्टम में बना सबसे बड़ा इम्पैक्ट क्रेटर है। इसका आकार रोमन कोलोसियम से भी बड़ा बताया गया है। यह गड्ढा नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर से करीब एक दशक पहले खोजे गए पिछले रिकॉर्ड वाले क्रेटर से तीन गुना बड़ा है।


इसका नाम दिवंगत वैज्ञानिक थॉमस मैकगेचिन के नाम पर रखा गया है।


शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस टकराव से चांद की सतह 66 मील से ज्यादा दूरी तक प्रभावित हुई।


धूल और पत्थर उम्मीद से ज्यादा ऊंचे कोण पर उछले। दूसरी स्टडी में क्रेटर के आसपास करीब चार मील चौड़ा ठंडा क्षेत्र मिला है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस घटना से चांद की ऊपरी मिट्टी उलट-पुलट गई।


इससे सतह के नीचे मौजूद सामग्री ऊपर आ गई, जिसे उन्होंने बागवानी जैसी प्रक्रिया से समझाया है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इतनी बड़ी घटना करीब 132 साल में एक बार होती है।


अध्ययन से यह भी पता चला कि चांद की ऊपरी मिट्टी पहले के अनुमान से ज्यादा तेजी से बदल रही है। इसका असर अपोलो मिशन के पैरों के निशानों पर भी पड़ सकता है।


अब शोधकर्ता यह पता लगाएंगे कि ऐसे टकराव से निकली सामग्री नासा के प्रस्तावित चांद बेस तक पहुंच सकती है या नहीं। इससे भविष्य के निर्माण में मदद मिलेगी।


Share This Article