Share This Article नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026। Tata Sons के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को एक बार फिर Executive Chairman नियुक्त करने का फैसला किया है। उन्हें मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है। बोर्ड के इस फैसले का Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने विरोध किया और प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। चार निदेशकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। चंद्रशेखरन की वापसी पर विवाद क्यों? यह फैसला ऐसे समय आया है जब चंद्रशेखरन ने अगस्त 2026 में संकेत दिया था कि वह फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं। इसके बाद गुरुवार की बोर्ड बैठक में उन्हें अपना फैसला reconsider करने के लिए कहा गया और बोर्ड ने बहुमत से पांच साल के नए कार्यकाल के लिए उनके नाम को मंजूरी दी। नोएल टाटा ने फैसले पर जताई आपत्ति नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया है। Tata Trusts की ओर से इस फैसले की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। ट्रस्ट का कहना है कि Tata Sons के Articles of Association में ट्रस्ट के नामित निदेशकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस मामले में पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ की कानूनी राय का भी हवाला दिया गया है, हालांकि बोर्ड ने उस राय को स्वीकार नहीं किया है। टाटा ग्रुप के शेयरों पर दिखा दबाव चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और Tata Sons की लिस्टिंग से जुड़े घटनाक्रम के बीच शुक्रवार को कई Tata Group stocks दबाव में कारोबार करते दिखे। रिपोर्टों के अनुसार Tata Chemicals, TCS, Tata Investment Corporation और Tata Motors Passenger Vehicles समेत कई शेयरों में शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज हुई। Tata Chemicals में गिरावट करीब 8 फीसदी तक पहुंची, जबकि TCS में भी दबाव देखने को मिला। Tata Sons की लिस्टिंग भी बनी बड़ा मुद्दा बोर्ड बैठक में Tata Sons की संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला भी किया गया है। यह घटनाक्रम भारतीय रिजर्व बैंक की नियामकीय स्थिति से जुड़ा है। Tata Trusts की ओर से लिस्टिंग के मुद्दे पर भी अलग रुख सामने आया है। इसी वजह से चंद्रशेखरन की नियुक्ति के साथ-साथ Tata Sons की भविष्य की संरचना और गवर्नेंस को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। बाजार में IT सेक्टर भी दबाव में शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में IT शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। TCS के साथ अन्य प्रमुख IT कंपनियों में भी कमजोरी दर्ज हुई। हालांकि व्यापक बाजार में कई अन्य सेक्टरों में तेजी रही। बाजार की चाल के दौरान Tata Group के शेयरों में उतार-चढ़ाव का प्रमुख कारण निवेशकों का Tata Sons से जुड़े नेतृत्व, संभावित लिस्टिंग और कॉरपोरेट गवर्नेंस के घटनाक्रम पर ध्यान माना जा रहा है। Share This Article Post navigation IPhone 18 Pro की पहली सेल आज से शुरू, Apple Store के बाहर रातभर लगी लंबी कतार, जानें कीमत और ऑफर्स ईपीएफओ का नया फैसला, 25,000 रुपये तक वेतन वालों को मिलेगा पीएफ पेंशन और बीमा लाभ