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रायपुर, 21सितंबर 2026 / ETrendingIndia / हर भूलना अल्जाइमर नहीं होता, लेकिन बार-बार एक ही बात पूछना, परिचित लोगों या रास्तों को पहचानने में परेशानी और रोजमर्रा के कामों में बदलाव जैसे संकेतों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।

21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस पर इस वर्ष शुरुआती निदान पर जोर दिया जा रहा है। 2026 की थीम है—“The Earlier You Know, The More You Can Do”।

अल्जाइमर और डिमेंशिया में अंतर

डिमेंशिया एक व्यापक स्थिति है, जिसमें याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम कारण है, लेकिन हर डिमेंशिया अल्जाइमर नहीं होता। अन्य कारणों में वैस्कुलर और लेवी बॉडी डिमेंशिया आदि शामिल हैं।

इन संकेतों को नजरअंदाज न करें

हाल की बातें बार-बार भूलना

एक ही सवाल बार-बार पूछना

परिचित लोगों या स्थानों को पहचानने में परेशानी

सही शब्द खोजने में कठिनाई

रोजमर्रा के कामों में परेशानी

व्यवहार या मनोदशा में असामान्य बदलाव

इन लक्षणों का मतलब सीधे अल्जाइमर नहीं है। दवाओं के प्रभाव, नींद की समस्या, अवसाद या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी ऐसी शिकायतों का कारण बन सकती हैं।

जीवनशैली से जोखिम कम करने पर जोर

WHO के 2026 के नए दिशानिर्देशों के अनुसार डिमेंशिया के जोखिम का 45% तक हिस्सा ऐसे कारकों से जुड़ा हो सकता है, जिन्हें रोका या टाला जा सकता है।

नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, धूम्रपान से दूरी, शराब का हानिकारक सेवन न करना, सामाजिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहना तथा ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना मददगार हो सकता है।

समय पर जांच क्यों जरूरी?

अल्जाइमर की पहचान केवल एक साधारण रक्त जांच से नहीं होती। डॉक्टर स्वास्थ्य इतिहास, संज्ञानात्मक परीक्षण और न्यूरोलॉजिकल जांच के साथ जरूरत पड़ने पर MRI/CT तथा अन्य परीक्षणों की मदद लेते हैं।

शुरुआती पहचान से मरीज और परिवार को इलाज, देखभाल और भविष्य की योजना बनाने का अधिक समय मिलता है।

परिवार का सहयोग बेहद जरूरी

अल्जाइमर केवल मरीज ही नहीं, पूरे परिवार को प्रभावित करता है। मरीज को डांटने या उसका मजाक बनाने के बजाय धैर्य, नियमित दिनचर्या और सुरक्षित वातावरण देना जरूरी है।

बीमारी बढ़ने के बावजूद उसकी गरिमा, स्वतंत्रता और सम्मान बनाए रखना देखभाल का अहम हिस्सा है।

दुनिया में बढ़ती चुनौती

WHO के अनुसार 2021 में दुनिया में करीब 5.7 करोड़ लोग डिमेंशिया के साथ जीवन जी रहे थे और हर साल लगभग 1 करोड़ नए मामले सामने आते हैं।

यह दिवस हमें संदेश देता है कि — भूलने को हमेशा उम्र का सामान्य असर मानकर टालें नहीं। शुरुआती पहचान, चिकित्सकीय सलाह, स्वस्थ जीवनशैली और परिवार का सहयोग मरीज की जीवन गुणवत्ता और गरिमा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


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