Share This Article उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारतीय चाय उद्योग को वैश्विक बाजार में और मजबूत बनाने के लिए आधुनिकीकरण, अनुसंधान, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाय उद्योग की प्रगति के साथ बागान श्रमिकों का कल्याण भी सुनिश्चित होना चाहिए। 100 साल पूरे होने पर उपासी फाउंडेशन का सम्मेलन कूनूर में उपासी (United Planters’ Association of Southern India) चाय अनुसंधान फाउंडेशन के शताब्दी सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसके 100 वर्षों के अनुसंधान योगदान की सराहना की। उन्होंने चाय अनुसंधान केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और रिसर्च नेटवर्क बढ़ाने की बात कही। थोक बिक्री से आगे बढ़े भारतीय ब्रांड उपराष्ट्रपति ने चाय उत्पादकों और निर्यातकों से केवल थोक चाय बेचने के बजाय मजबूत भारतीय चाय ब्रांड विकसित करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन से भारतीय चाय को बेहतर कीमत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान मिल सकती है। उत्पादन के साथ गुणवत्ता और तकनीक जरूरी उन्होंने चाय कारखानों के आधुनिकीकरण, लागत कम करने, उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन पर जोर दिया। भारत को बदलती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच नए बाजारों की तलाश और निरंतर नवाचार की जरूरत है। भारत का चाय निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर Tea Board के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चाय उत्पादन रिकॉर्ड 138.274 करोड़ किलोग्राम रहा। इसी दौरान चाय निर्यात 28.211 करोड़ किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और निर्यात से ₹8,718.83 करोड़ की आय हुई। सम्मेलन में उपराष्ट्रपति ने “Tea Research in South India – A Compendium” पुस्तक का भी विमोचन किया। Share This Article Post navigation SAIL बना भारत के टॉप 25 एम्प्लॉयर्स में शामिल, TIME-Statista रैंकिंग में 25वां स्थान